अब एक और युद्ध बीबीसी खबर के साथ -----

लोकतंत्र में अपनी विशेष पहचान वाली पत्रकारिता का आधुनिक काल में अपना विशेष योगदान है। समाज में लोग इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी मानते हैं। पत्रकारिता का इतिहास बहुत पुराना है। नई पीढ़ियों ने अपने आपको इसमें खपाया भी है। देश के अंदर जब भी उथल पुथल मची है तब पत्रकारिता ने अपनी अहम भूमिका निभाते हुए देश की अस्मिता को बचाने का प्रयास किया है। पत्रकारिता की अस्मिता को बचाने के लिए लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर इसकी लाज रखी। और आज भी लोगों के दिलों में पत्रकारिता का अपनी जगह बनाई है।

 

समय के बदलते आयाम ने इसके स्वरूप को बिगाड़ने का प्रयास किया है। हमारे ही बीच के लोगों ने पत्रकारिता को ढाल बनाकर लोगों को अपना शिकार बनाया है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि रुपये-पैसे कमाने के लिए राजनीति और रसूकदार लोगों के बीच में अपनी कलम गिरवी रख दी हो, लेकिन पत्रकारिता की पहचान को मिटाने में कामयाब नहीं हो सके। समय-समय पर लोगों ने पत्रकारिता को लेकर कई भ्रामक टिप्पणियां भी की। इसको बाजार में बेचने की कोशिश की गई, वहीं कइयों ने इसके बेच भी दिया, लेकिन लोकतंत्र में अपनी विशेष छवि बनाने वाले लोगों की आज भी पहचान का जरिया पत्रकारिता ही है।

 

पत्रकारिता अपने कई स्वरूपों में लोगों तक पहुंची है। समय बदला माध्यम बदल गए। कभी अखबार का क्रेज था तो कभी टेलीविजन ने इसे एक नई पहचान दी, वहीं न्यू मीडिया ने इसे अपनी ताकत देकर इसे सबसे अधिक मजबूत करने का काम किया है। यही कारण है कि चाहे किसी राजनेता का बयान हो यह देश में घटित होने वाली कोई भी छोटी से लेकर बड़ी घटना की जानकारी। पलभर में लोगों के मोबाइल में कैद हो जाती है । लोग इसे अपने अलग-अलग माध्यमों की सहायता से अपने करीबियों तक पहुचाने में दिनभर लगे रहते हैं। समय बदला है, माध्यम बदले है, कहने वाले लोग कहते रहे पत्रकारिता कमजोर नहीं हुई बल्कि इन सभी संसाधनों से पहले से कई गुना अधिक मजबूत हो गई है।

 

डिजिटल क्रांति को एक नई पहचान देने के लिए बीबीसी खबर ने भारत ही नहीं विश्व भर के सभी मीडिया संस्थानों के सामने एक नई चुनौती पेश की। पल-पल की अपडेट, छोटी से लेकर बड़ी जानकारियों को सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्मों पहुचाने के लिए हमारी टीम सिद्दत के साथ काम करती है। हमारा प्रयास किसी को हांनि पहुचाना नहीं है। ना ही पत्रकारिता के आड़ लेकर किसी भी प्रकार की आर्थिक लड़ाई की हिस्सेदारी करना। हमारी टीम का एक अपना उद्देश्य है कि समाज की हर छोटी से बड़ी घटना की जानकारी अपनों तक पहुंचाई जाए। पीड़ितों को न्याय मिले। वंचितों को अधिकार मिले। हम उनकी आवाज बनकर उभरे हैं, जिनकी आवाज आज समाज के बड़े मीडिया घराने नहीं सुनते रहे हैं या ऐसा कह सकते हैं कि बड़ी खबरों के आगे यहां पर स्पेस की क्राइसेस जैसी समस्या आम बात है। वजह और भी हो सकती हैं। बीबीसी खबर अपने सभी दर्शकों से निवेदन करता है। समाज के आसपास होने वाली किसी भी घटना को लेकर चुपचाप नहीं बैठना है। अगर आप चुपचाप उसे देखते हैं आप भी अपराधी की श्रेणी में आते हैं। मीडिया में अपनी ऩई हिस्सेदारी बनाने के लिए लोगों को तैयार करिए साथ लोगों को जागरूक करिए के ये सभी लोग समाज का हिस्सा बनें। साथ ही मीडिया की अस्मिता को जिंदा करने के लिए एक कारगार प्रयास करें। इसकी हिस्सेदारी में आपकी भूमिका इसे और मजबूत करेगी। साथ ही बीबीसी खबर अपनी एक विशेष पहचान बनाने में सफल होगा। टीम का सामूहिक प्रयास ही हम आपतक पहुंचे। इसके लिए आपका सहयोग आपेक्षित है। खुद को तैयार रखिए । गलत नहीं देखेंगे, और सहेंगे भी नहीं की सोच के साथ आगे बढ़िए हमारी टीम आपका सहयोग करेगी।

 

डिजिटल मीडिया की इस महत्वपूर्ण हिस्सेदारी के लिए आने वाली पीढ़ियां आपका अनुसरण करेगी। कोई भी व्यक्ति कुछ भी गलत करने से पहले सोचेगा। कहीं कोई पत्रकार तो नहीं है। यही डर समाज में परिवर्तन लाएगा। मुझे उम्मीद है कि आप अपने भारत को साफ- स्वच्छ के साथ एक ईमानदार और विकसित भारत देखना चाहते हैं। यह सोच आपके परिवार का विकास करेगा, जिससे दुनिया के सामने भारत की अपनी एक विशेष पहचान बनेगी। हम लोग आगे बढ़ेंगे। तभी जाकर भारत विश्व गुरु बनेगा।

 

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