झारखंड के सरकारी अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर, 8000 मरीज हर महीने इलाज के लिए जा रहे दूसरे राज्यों में

बीबीसीखबर, झारखण्डUpdated 31-05-2018
झारखंड

 रांची.झारखंड को राज्य बने 18 साल हो गए। पर सरकारी अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर बने हुए हैं। यहां मरीज सुपर स्पेशियलिटी ही नहीं हेपेटाइटिस-बी और सी जैसी कुछ आम हो चुकी बीमारियों के इलाज के लिए भी दूसरे राज्यों को जाने को मजबूर हैं। इन अस्पतालों की बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें हैं। कमरे भी बहुत हैं। फंड भी है। मशीनें भी रखी हैं। रोजाना सैकड़ों मरीज भी है लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स और तकनीकी सुविधाओं की कमी के चलते हर महीने करीब 8000 मरीज दूसरे राज्यों में इलाज के लिए रेफर किए जाते हैं। या यहां की कमियां देख खुद चले जाते हैं। इनमें न्यूरो, हार्ट या कैंसर की जटिल बीमारियों के ही नहीं हेपेटाइटिस जैसी आम बीमारी के मरीज भी होते हैं। ये स्थिति तब है जब सरकारी तंत्र ने ही हेपेटाइटिस को इतनी आम बीमारी मान लिया है कि बच्चों के सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में कई राज्यों में हेपेटाइटिस का टीका भी शामिल है।


हार्ट, न्यूरो या कैंसर तक ही दिक्कत नहीं, और भी हैं कई समस्याएं

- रांची के बड़े डॉक्टरों का भी यही मानना है कि मजबूरी में मरीज को बाहर भेजना पड़ता है। हालांकि सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, लेकिन अब भी स्पेशिल्स्ट डॉक्टरों, अत्याधुनिक मशीनों और ट्रेंड मेडिकल स्टाफ की कमी है।

- हेपेटाइटिस या आंखों की कुछ आम बीमारियों के मरीजों को भी बाहर रेफर करने के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि यहां हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षणों का तो इलाज संभव है, मगर एक्यूट केसों में मरीज को बाहर भेजना पड़ता है।

- आंखों की भी सामान्य बीमारियों का यहां इलाज हो जाता है, हालांकि आंखों की न्यूरो संबंधी परेशानियों के लिए यहां सुविधा नहीं है। हर माह सिर्फ आंखों की ही इन बीमारियों के 500 से ज्यादा मरीज दूसरे राज्यों को जाने को मजबूर होते हैं।

- सरकार के स्तर पर स्पेशलिस्ट्स की भर्तियों की बात तो हो रही है, मगर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अगर इन कमियों को दूर कर दिया जाए तो रांची को राज्य का मेडिकल हब बनने से कोई नहीं रोक सकता।

कार्डियोलॉजी (हार्ट)

इन बीमारियों का इलाज नहीं

- पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी : रांची-झारखंड में करीब 10 कार्डियोलॉजिस्ट हैं, लेकिन पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। 
- इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी (धड़कन संबंधी बीमारियां) : इलेक्ट्रो फिजियोलॉजिस्ट पूरे झारखंड में नहीं है। 
- कार्डियोजेरियाट्रिक्स (बुजुर्ग मरीजों की दिल संबंधी बीमारियां) : रिम्स में एक भी डॉक्टर नहीं।
- कंप्लीकेटेड एंजियोप्लास्टी : दिल में ज्यादा ब्लॉकेज जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं, उनके इलाज के लिए सुविधाएं नहीं है। 
- ईपीएस (इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी स्टडी) व आरएफए (रेडियो फ्रिक्वेंसी एवलेशन) की सुविधा भी मौजूद नहीं। 
- ओपन हार्ट सर्जरी : रिम्स में ओपन हार्ट सर्जन हैं, पर अभी ओटी और हार्ट लंग्स मशीन नहीं है, इसलिए सर्जरी शुरू नहीं हो रही है।

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