हमारे अंदर है आध्यात्मिक खजाना

बीबीसीखबर, परामनोविज्ञानUpdated 10-08-2018
हमारे
गणेश मिश्रा बीबीसी खबर । 
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है, जब वह महसूस करता है कि उसका यह शरीर एक दिन नष्ट हो जाएगा और उसके संगी-साथियों के शरीर भी एक दिन मृत्यू को प्राप्त हो जाएंगे । इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है । हमें चाहिए कि हम अपना ध्यान शरीर की नश्वरता से हटाएं, अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप को जानें और सदा-सदा की अमरता को खोजने का प्रयास करें ।
हममें से अधिकतर लोग इस वास्तविकता को मानना नहीं चाहते कि हम शारीरिक स्तर पर नश्वर है । केवल वही लोग , जो मृत्यू की अनिवार्यता का अनुभव कर लेते हैं , वे इस दुख से बचने के लिए अपना ध्यान कोई दूसरा मार्ग खोजने की ओर लगाते हैं । वें स्वयं को शरीर न मान कर आत्मा के रूप में पहचानना शुरू कर देते हैं । 

   संत और महापुरूष हमारे अस्तित्व की वास्तविकता के प्रति जागृत होते हैं । वे जानते हैं कि सभी आत्माएं हैं, जो एक ही परम - आत्मा के पास से आई हैं । वे जानते हैं कि जब हम स्वयं को आत्मा के रूप में पहचान लेते हैं, तब हमें एक सच्चा अंतरिक्ष-यान मिल जाता है, जिसकी मदद से हम इस भौतिक जगत के गुरूत्वाकर्षण से ऊपर उठ सकते हैं ।           

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