कूलन में , केलि में बसंत

बीबीसीखबर, परामनोविज्ञानUpdated 10-08-2018
कूलन
गणेश मिश्री बीबीसी खबर ।
कवि कहता है- हे नादान मनुष्य , तुम यहां पर कूलन में , कलियन में बसंत को कहां ढूंढ़ता फिर रहा है ? पहले तो यह बता कि तू कौन सी दुनिया का प्राणी है ? अपना संदेह मिटाने के लिए फिर कवि प्रश्न करता है- कहीं तू एलियन तो नहीं ? अर्थात तू इस दुनिया का नहीं है। कवि कहता है कि तू परागन से , बागन से बाहर निकलकर डिजिटल दुनिया की तरफ कदम बढ़ा । क्या तुझे इतना भी नहीं पता कि बसंत ने पिछले कुछ वर्षों से अपना पता बदल लिया है ? अर्थात तुझे कुछ भी खबर नहीं है, तब कवि लगभग धिक्कारता हुआ कहता है कि नादान मानव , तू अपनी बुद्धि कब बदलेगा ।
      कवि आगे राह बतलाते हुए कहता है- हे मूढ़मति मनुष्य, अगर तुझे बसंत को ढूढ़ना ही है , तो उसे गूगल पर ढूढ़ , फेसबुक पर तलाश , टि्वटर पर ढूंढ़ । वहां जाकर सर्च मार । वहां से तुझे बसंत के और उसकी बहार के असंख्य ठिकाने मिलेंगे । वहां से अपनी इच्छा के अनुसार बसंत के साथ व्यवहार कर । कवि फिर भेद की बात उजागर करता हुआ कहता है- आजकल बसंत के मौसम में ही नहीं आता । वह पतझड़ में भी आ सकता है । बसंत को सेव भी किया जा सकता है ।

  

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