सुरक्षा की चिंता

बीबीसीखबर, संपादकीयUpdated 11-08-2018
सुरक्षा
गणेश मिश्रा बीबीसी खबर ।
पिछले चार दशक से भी अधिक वक्त से अफगानिस्तान सुरक्षा की भारी कमी का शिकार है । इस दरम्यान इसने कम्युनिस्ट, मुजाहिदीन, तालिबान और इंतिखाब के जरिए चुनी गई सरकारों को देखा , लेकिन इस पूरे अंतराल में जो एक चीज मुसलसल कायम रही, वह है सुरक्षा की कमी । कम्युनिस्ट सरकार के वजूद में आने से पहले से ही सुरक्षा मामलों से अवाम की हिमायम गायब रही । दरअसल, अफगानिस्तान की तमाम सरकारों की सुरक्षा - व्यवस्था की नाकामी की एक बड़ी वजह यही है । अफगानिस्तान के सभी नागरिकों ने , जिनमें अलग-अलग कबीलाई समूहों के लोग शामिल हैं , इनमें से किसी को एक जायज हुकूमत नहीं माना । अफगानिस्तान का इतिहास यह दिखाता है कि इसके तमाम शासकों को वैधता की समस्या से कमोबेश जूझना ही पड़ा है । 
 

हम गहराई से इसकी पड़ताल करें, शासकों के सत्ता हासिल करने के तरीकों पर गौर करें, तो इन सबमें एक आम बात दिखेगी कि इन्होंने सभी सामाजिक समूहों की आर्थिक बदहाली को दूर किए बिना ही शासन किया । चूंकि लगभग सभी ही शासकों ने किसी न किसी कबीले या इलाके की बुनियाद पर सत्ता प्राप्त की या अपनी ताकत का विस्तार किया, इसलिए उनकी कोशिश यही रही कि उन्ही कबीलों या इलाकों को आर्थिक संसाधन का लाभ दिया जाए । समावेशीकरण के अभाव में सरकारी प्रशासन कबीलाई - क्षेत्रीय प्रशासनिक नीतियों पर आधारित रहा ।          

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