अतीत की चेतना से मुक्ति का मार्ग

बीबीसीखबर, योग-ध्यानUpdated 11-08-2018
अतीत
गणेश मिश्रा बीबीसी खबर । 
हमारी प्रवृत्ति है कि हम सुखद मनोभावों को छोड़ कर दुखद भावनाओं से चिपक जाते हैं । अधिकतर दुनिया यही करती हैं । परन्तु ध्यान द्वारा जब चेतना मुक्त और संवर्धित होती है , तब नकारात्मक मनोभावों को पकड़े रखने की प्रवृत्ति सहज ही मिट जाती है । हम वर्तमान क्षण में जीना शुरू कर देते हैं और काबिल हो जाते हैं कि अपने अतीत से मुक्त हो सकें ।
लोग कितने ही अच्छे क्यों ना हों, किसी भी रिश्ते में गलतउहमिंया पैदा हो ही जाती हैं । यहां तक कि एक छोटी सी गलतफहमी हमारी भावनाओं को विकृत करके नकारात्मक रूख ले सकती है । परंतु यदि हम अपने आप को मुक्त कर सकें और चेतना के प्रत्येक क्षण के वैभव में मस्त हो जाने की क्षमता पर केंद्रित हो सकें तो इससे हमारा बचाव हो सकता है । यह सत्य उजागर होता है कि प्रत्येक क्षण हमारे विकास में सहायक है ।

ध्यान अतीत की चेतना से देता है मुक्तिः

ध्यान है अतीत और अतीत की घटनाओं के प्रति क्रोध से मुक्त हो जाना तथा भविष्य के योजनाओं को छोड़ देना । जब तुम योजनाएं बुनते हो तो वह तुम्हे स्वयं की गहराई में डूबने से रोकता है । ध्यान करते समय तीन नियमों को याद रखना है- मैं कुछ भी नहीं हूं ( अकिंचन ) , मुझे किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है ( अचाह ) , मैं कुछ भी नहीं करने जा रहा हूं ( अप्रयत्र ) । यदि तुम्हारे पास ये तीनों गुण है तो तुम ध्यान में उतर सकोगे । अतीत और अतीत की घटनाओं के प्रति क्रोध तथा भविष्य के लिए योजनाओं से मुक्त हो जाने का एक ही प्रभावशाली मार्ग है । यह ध्यान है । यह हमारी चेतना को अतीत से मुक्ति दे देता है ।       

Follow Us