जानिए बकरीद के दिन क्यों लेते है बकरी की जान

बीबीसीखबर, देशUpdated 22-08-2018
जानिए

 

सुष्मिता शुक्ला बीबीसी खबर

इस्लाम धर्म को मानने वाले रमजान खत्म होने के लगभग 70 दिनों बाद बकरीद मनाते हैं। इसे ईद-उल-जुहा भी कहते हैं।बकरीद के दिन बकरी की कुर्बानी दी जाती है। इस साल यह त्योहार तीन दिन 22, 23 और 24 अगस्त को मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है बकरीद। इस दिन मुसलमानों के घर में कुछ चौपाया जानवरों की कुर्बानी देने की प्रथा है। कुर्बानी देने के बाद इसे तीन भागों में बांटकर सबको  दिया जाता है। इस्लाम धर्म में खास पैगंबरों में से पैगंबर हजरत इब्राहीम एक हैं। कहा जाता है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहीम से उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। चूंकि हजरत इब्राहीम के इस्माइल नाम का इकलौता बेटा था। जिसे वह सबसे ज्यादा प्यार करते थे, क्योंकि यह औलाद उनके बुढ़ापे में हुई थी। लेकिन अल्लाह का आदेश मानकर वह कुर्बानी देने को तैयार हो गए।

 रास्ते में शैतान ने रोका...
हजरत इब्राहीम जब अपने बेटे की कुर्बानी के लिए जा रहे थे तभी उन्हें रास्ते में शैतान मिला और कहा कि आपके पास इकलौती औलाद है, अगर आपने इसकी कुर्बानी दी तो बुढ़ापे में आपका सहारा कौन होगा। इस पर उनका मन कुर्बानी देने से बदला लेकिन बाद में उन्होंने फिर सोचा कि अल्लाह का आदेश के बारे में सोचने लगे की ऐसे तो मैं अल्लाह के आदेश को पूरा नहीं कर पाएगा  इसके बाद उन्होंने अपने आखों में पट्टी बांध ली ताकि बेटे  को कुर्बान होते देख उन्हें दुख न हो। मान्यता है कि जब उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी के बाद आंखें खोलीं तो पाया कि उनका बेटा सलामत खड़ा था और एक बकरे की कुर्बानी हुई थी। ऐसी मान्यता है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहीम के बेटे की जगह पर बकरा खड़ा कर दिया था।

तभी से हर साल इस दिन को बकरीद के रूप में मनाने लगे । लोग अल्लाह का आदेश मानकर बकरा या मेमना की कुर्बानी देते हैं।

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