दागी उम्मीदवारों को मोदी सरकार की फटकार

बीबीसीखबर, देशUpdated 28-08-2018
दागी

दिव्यांका शुक्ला , बीबीसी खबर

दागी नेताओं से जुड़ी एक याचिका जिसमें मांग की गई है कि अगर किसी व्यक्ति को गम्भीर अपराधों के लिए सजा मिली है तो ऐसे व्यक्ति या नेता के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए ।मांग यह  भी है कि अगर किसी सासंद या विधायक पर आरोप तय हो जाते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए ।सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के बाद अपना निर्णय ले लिया है ।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति आपराधिक पृष्ठभूमि का है और उसके खिलाफ रेप, मर्डर और करप्शन जैसे गंभीर अपराध में आरोप तय होते हैं तो उसे किसी राजनीतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने से रोका जाए। 'इसका विरोध केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल ने किया और कहा कि, 'आपराधिक न्यायशास्त्र के मुताबिक एक व्यक्ति तब तक निर्दोष होता है, जब तक उसे दोषी करार न दिया जाए. ये एक लंबी प्रक्रिया है. इसलिए कोर्ट को इस तरह के आदेश जारी नहीं करने चाहिए । जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कई मामलों में झूठी शिकायतें पाई जाती हैं. ऐसे में बहुत सारे लोग आरोप मुक्त हो जाते हैं सवाल उठाया तो इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने बताया कि 74 फीसदी मामलों में लोग बरी हो जाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ये पॉलिसी मैटर है और कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए ।बतातें चलें कि इससे पहले सुनवाई में पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि क्या चुनाव आयोग को ये शक्ति दी जा सकती है कि वो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को चुनाव में उतारें तो उसे चुनाव चिन्ह देने से इनकार कर दे? जिसका विरोध करते हुए केन्द्र सरकार ने कहा कि ये चुने हुए प्रतिनिधी ही तय करेंगे । आज सभी दलीलों के बाद कोर्ट में फैसले को सुरक्षित रख लिया गया है ।  

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