जीवन का आधार है अच्छा आचरण

बीबीसीखबर, परामनोविज्ञानUpdated 04-09-2018
जीवन
गणेश मिश्रा बीबीसी खबर ।
हमारे आसपास प्रायः एक चीज देकने को मिलती है। चाहे युवा हों या प्रौढ़, उनके विचार तो बहुत ऊंचे होते हैं , लेकिन व्यवहार बहुत नीचा होता है। हम इसे इस तरह भी कह सकते हैं- लोग सिद्धांत तो बहुत ऊंचा रखते है , लेकिन कर्म बहुत नीचा ।
इस संदर्भ में हमारे लिए दो-तीन बातें समझनी उपयोगी होंगी। पहली बात तो यह है कि यदि हमारे विचार श्रेष्ठ होते है, तो कर्म अनिवार्य रूप से श्रेष्ठ हो जाता है। इस भ्रम में रहने की कोई जरूरत नहीं है कि विचार हमारे श्रेष्ठ थे और फिर कर्म हमारा निकृष्ट रहा। श्रेष्ट विचार अनिवार्य रूप से श्रेष्ट कर्म के जन्मदाता बनते हैं। कहीं न कहीं विचार और कर्म के बीच सही तारतम्य नहीं हुआ, इस कारण हमारा कर्म भी सही नहीं हो पाता है। अगर श्रेष्ठ कर्म का जन्म न हुआ हो, तो इसका अर्थ है कि विचार सत्य हो और आचरण असत्य की ओर चला जाए। यह तो असंभव है कि ज्ञान तो स्पष्ट हो और जीवन भटक जाए। यह तो कुछ ऐसा ही हुआ कि आंखें तो बिल्कुल ठीक थीं, लेकिन फिर भी हम दीवार से टकरा गए।

उन संशयों और तर्कों में समय न गवाएं , जिनका इसके साथ कोई संबंध नहीं है। सारी वस्तुएं बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे में गति करती हैं और घुल-मिल जाती हैं। इस बोध में जीना अपूर्णता के विषय में चिंतारहित होना है। इस आस्था में जीना अद्वैत का मार्ग है, क्योंकि अद्वैती वह है जिसके पास आस्थावान चित्त है। शब्द , प्रतीकों , भाषा के कारण । आप सत्य में नहीं ,भाषाई स्वप्न मे खो गए है क्योकि सत्य सदा आपके समक्ष है लेकिन आप सत्य के सामने सदा नही रहते है आप कही और होते है आपका मनभटकता रहता है भटकने कि बजाय मन को स्थिर करे तभी ज्ञान भी सही होगा ।  

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