वास्तु अनुकूल पूजन कक्ष से होगी आध्यात्मिक उन्नति

बीबीसीखबर, वास्तुUpdated 05-09-2018
वास्तु

दिव्यांका शुक्ला , बीबीसी खबर

हर मकान या दुकान में पूजाघर जरूर होता है । घरों में तो पूजन कक्ष का होना और भी जरूरी है क्योंकि यह मकान का वह हिस्सा है जो हमारी आध्यात्मिक उन्नति और शान्ति से जुड़ा होता है । यहां आते ही हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है औऱ नकारात्मकता खत्म हो जाती है इसलिए अगर यह जगह वास्तु के अनुरूप होती है तो उसका हमारे जीवन पर बेहतर असर होता है । कुछ वास्तु सिद्धान्त हैं , जिनपर गौर करके हम अपने पूजाघर को अधिक प्रभावशाली बना सकते है ।

1-पूजाघर में कलश ,गुंबद इत्यादि नहीम बनाना चाहिए ।

2-पूजाघर में किसी प्राचीन  मंदिर से लाई गई प्रतिमा या स्थिर प्रतिम को स्थापित नहीं करना चाहिए ।

3-पूजाघर  में यदि हवन की व्यवस्था है तो वह हमेशा आग्नेय कोण में ही किया जाना चाहिए ।

4-पूजास्थल में कभी भी धन या बहुमूल्य वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए ।

5- पूजाघर  की दीवार का रंग लाइट होना चाहिए जैसे- सफेद , हल्का पीला या हल्का नीला ।

6- पूजाघर  की फर्श सफेद अथवा हल्के पीले रंग की होनी चाहिए।

7- पूजाघर   मे शयनकक्ष नहीं बनवाना चाहिए। यदि किसी कारणवश ऐसा करना पड़े तो वह शयनकक्ष विवाहितों के लिए नहीं होना चाहिए ।

8- पूजाघर   के निकट एवं भवन के ईशान कोण में झाडू या कूड़ादान नहीं रखना चाहिए ।

9- पूजाघर   में प्रतिमांए कभी भी प्रवेशद्वार के सम्मुख नहीं होनी चाहिए ।

10- पूजाघर  में ब्रम्हा, विष्णु , शिव , इंद्र, सूर्य एंव कार्तिकेय का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए ।

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