जिंदगी सीखाती है जीने का सबक

बीबीसीखबर, संपादकीयUpdated 09-09-2018
जिंदगी

दिव्यांका शुक्ला , बीबीसी खबर

दुनिया में आंख खुलते ही सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो ताउम्र चलती है । प्रकृति ,परिवेश ,जीव-जंतु ,लोग घटनाएं ,स्थितियां हमें कुछ ना कुछ सिखाती रहती हैं ।बीच-बीच में कठिन परिस्थितियों के रूप में परीक्षाएं आती हैं । इन्हें पार करने के बाद ही पता चलता है कि जीवन के सबक अच्छी तरह याद हुए या नहीं । कई बार यह परीक्षाएं डराती हैं और हौसले को कम करने लगती हैं फिर एकाएक कहीं मन में छुपी बैठी उम्मीद रोशनी की मशाल लिए आ खड़ी होती है । सामने जब सारी दुनिया कहती है हार मान लो सच तो यह है कि यही परीक्षाएं हमारी छुपी हुई ताकत को बाहर निकालने में मदद करती है । कठिनाइयों से बस इतना कहना है कि हम उन से ज्यादा मजबूत है । वह हार मानने पर मजबूर हो जाएंगी ।

जिंदगी और वक्त

माता-पिता और शिक्षक के बाद व्यक्ति जो कुछ भी सीखता है ।वह अपनी जिंदगी के अनुभव और वक्त से सीखता है ,इसीलिए कहते हैं जिंदगी और वक्त दो सबसे महत्वपूर्ण टीचर हैं। जीवन सिखाता है समय का सदुपयोग करो और समय जीवन के सही मायने बताता है । स्कूल में शिक्षक पढ़ा सिखाकर इंतिहान लेते हैं मगर वक्त ऐसा गुरु है ,जो इंतिहान लेकर सिखाता है ।जब इंसान अच्छे वक्त से नहीं सीख पाता तो जल्द ही बुरा वक्त सामने आ जाता है और वह अपने ढंग से सबक सिखा देता है । शायद इसलिए ज्ञानी महापुरुषों ने कहा है कि जिंदगी में बुरा वक्त आना भी जरूरी है । तभी इंसान अपने- पराए, अच्छे- बुरे और उचित-अनुचित का फर्क समझ पाता है ।

समय बहुत गतिशील होता है । आज इस पल हम कुछ पूछते हैं, मगर अगले पल ही क्या हो जाए, कोई नहीं जान सकता । इस बारे में महाभारत में एक प्रेरक प्रसंग आता है । एक बार युधिष्ठिर अपने भाइयों और द्रौपदी के संग बैठे बातचीत कर रहे थे कि द्वारपाल ने सूचित किया दो अतिथि उनसे मिलना चाहते हैं ।युधिष्ठिर ने उन्हें अगले दिन मिलने को कहा इस पर भीम बातचीत के बीच में उठकर बाहर चले गए और राज महल के द्वार पर घंटा बजाने लगे यह तब बजाया जाता था । जब कोई अजीब घटना होती थी, जब सभी ने इसका कारण जानना चाहा तो भीम ने प्रजा से कहा कि उनके राजा तो यमराज से भी श्रेष्ठ हो गए हैं । युधिष्ठिर को कुछ समझ ना आया इस पर भीम ने कहा आप ने अतिथियों को कल बुलाया है ।क्या आपको भरोसा है कि आप कल जीवित रहेंगे । ऐसा दावा तो कोई नहीं कर सकता कि कल क्या घटित होगा ।अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो जरूर आपको पता होगा कि आप कल तक धरती पर रहेंगे ।

युधिष्ठिर को तुरंत अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने द्वारपाल से कहा कि वह अतिथियों को मिलने के लिए बुला ले ।

प्रकृति की सीख

समय के बाद अगर कोई बड़ा शिक्षक है तो वह प्रकृति । ये हमें  जितना देती है उसका कर्ज शायद ही कभी इंसान चुका सके । प्रकृति का सम्मान ना करने का ही दुष्परिणाम है जो आज पूरी दुनिया प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रही है । प्रकृति को लगातार नुकसान पहुंचाने और संसाधनों का दोहन करते जाने के कारण ही आज समूचा विश्व प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन से जूझ रहा है । प्रकृति की हर चीज महत्वपूर्ण है । जब मनुष्य उनके साथ सही तालमेल नहीं बैठा पाता तो उसी की सजा प्रकृति देती है । चींटी देखें छोटी सी होती है चींटी लेकिन चलती है वह सिखाती है कि हौसला हो तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है और निरंतर मेहनत से हालात साधा जा सकता है । प्रकृति ना सिर्फ नियम और अनुशासन सिखाती है बल्कि जीवन में सफलता-विफलता,हार-जीत, जन्म-मृत्यु जैसी तमाम स्थितियों का सामना करना भी सिखाती है ।जब कभी उदास निराश हो जीवन से हार मानने लगे पत्थर के बारे में सोचें  । जब पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं बचता । शाख सूख जाती है वह तब भी जिंदा है मुलायम पत्तियों का इंतजार करती है ।

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