एक कंगन से जीवन की सीख

बीबीसीखबर, संपादकीयUpdated 12-09-2018
एक

 गणेश मिश्रा ,बीबीसी खबर

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के बचपन में एक ऐसी घटना हुई, जिसने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया। एक दिन उनके घर पर एक भिखारी आया। भिखारी को हाथ फैलाए देखकर ईश्वर चंद्र के मन में दया का भाव पैदा हुआ। वह घर के अंदर जाकर अपनी मां से उस भिखारी को कुछ देने बोले। घर पर देने के लिए कुछ भी नहीं था। उनकी मां को समझ नहीं आया कि वह उसे क्या दें? उनकी नजर उनके कंगन पर गई। उन्होंने झट से हाथों से कंगन निकालकर ईश्वर चंद्र को दे दिया। उन्होंने कहा कि जिस दिन तुम बड़े हो जाओगे, उस दिन मेरे लिए दूसरा बनवा देना ।

जब ईश्वर चंद्र कमाने लगे, तो अपनी पहली कमाई से मां को सोने के कंगन बनवाकर दिए। उन्होंने मां से कहा कि आज मैंने बचपन का तुम्हारा कर्ज उतार दिया। उनकी मां ने कहा कि बेटे, मेरा कर्ज उस दिन उतरेगा, जब किसी और जरूरतमंद के लिे मुझे ये कंगन दोबारा नहीं उतारने होंगे। मां की सीख ईश्वर चंद्र के दिल को छू गई। इस बात से उनके जीवन का दर्शन ही बदल गया। उन्होंने प्रण किया कि वे अपना जीवन गरीब-दुखियों की सेवा करने और उनके कष्ट दूर करने में बिताएंगे ।                 

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