यात्रियों की जान जोखिम में डालना गलती नहीं अपराध है

बीबीसीखबर, संपादकीयUpdated 21-09-2018
यात्रियों

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फ्लाइट 9डब्ल्यू 697 में पैसेंजर्स और केबिन क्रू के पांच मेंबर सवार थे । प्लेन हवा में था अचानक लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी । लोगों के कान नाक से खून आने लगा ।सीट के ऊपर लगे आक्सीजन मास्क नीचे झूलने लगे।स्थिति भयावह होने लगी। समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है । आनन-फानन में प्लेन की लैंडिंग कराई गई और उन्हें अस्पताल भेजा गया है । बताया जा रहा है कि उड़ान भरते समय क्रू मेंबर ब्लीड स्विच सलेक्ट करना भूल गए थे, जिसकी वजह से केबिन प्रेशर सामान्य नहीं रखा जा सका और ऑक्सीजन मास्क नीचे आ गए । इस मामले में क्रू मेंबर की गलती मानते हुए एविएशन कंपनी ने उन्हें जांच होने तक ड्यूटी से हटा दिया ,लेकिन फिर वही सवाल खड़ा हो गया । सिर्फ गलती मानने से इतनी बड़ी लापरवाही से कैसे बचा जा सकता है । बताया जा रहा है कि कैबिन का प्रेशर चेक करना क्रू मेंबर की ड्यूटी में शामिल है । ऐसे में से सिर्फ एक गलती का नाम नहीं दिया जा सकता है। यह लापरवाही है । अपनी जिम्मेदारी निभाने की गुस्ताखी है । एविएशन कम्पनी सिर्फ गलती  शब्द कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है । इसका मतलब यह है कि कंपनी जब क्रू मेंबर्स रिक्रूट का ट्रेनिंग करती है । तब भी लापरवाही की जाती है । उन्हें जवाबदेह और जिम्मेदार होना क्यों नहीं सिखाया जाता । उनके लिए सिर्फ एक गलती लोगों की जान पर बन आई है। नानावटी हॉस्पिटल के डॉक्टर का कहना है कि जिन पैसेंजर्स का वहां इलाज हो रहा है । उनके नाक और कान से खून निकल रहा है । इसे बानोट्रॉमा कहते हैं । कुछ समय के लिए बहुत से यात्रियों को बहरापन की समस्या पैदा हो गई थी । फिलहाल उन यात्रियों को हवाई सफर करने से मना कर दिया गया है।

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