प्रसाद में जहर मिलाने की साजिश का पर्दाफाश

बीबीसीखबर, देशUpdated 20-12-2018
प्रसाद

 बीबीसी खबर

कर्नाटक में चमराजनगर जिले के कोल्लेगल तालुका स्थित सुलवाड़ी गांव में प्रसाद से हुई 15 लोगों की मौत के सनसनीखेज मामले का बुधवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। पुलिस ने बताया कि मंदिर के ट्रस्टी को बेदखल करने और वहां चढ़ने वाले चढ़ावे पर अपना अधिकार स्थापित करने के लिए मठाधीश ने यह खौफनाक साजिश रची थी।

 मठाधीश के निर्देश पर उसकी प्रेमिका, प्रेमिका के पति और नजदीक के ही एक मंदिर के पुजारी ने 14 दिसंबर को प्रसाद में जहर मिला दिया था। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 100 से ज्यादा भक्तों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। साजिश का भंडाफोड़ होने के बाद मठाधीश समेत उसके तीन अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी आरोपियों को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मठाधीश, जो कोल्लेगल तालुक स्थित मठ में सहायक पुजारी भी हैं, उन्होंने जांचकर्ताओं को भ्रमित करने की कोशिश की। इसके बावजूद पुलिस ने मठाधीश की प्रेमिका अंबिका के घर में कृषि विभाग के एक अधिकारी के संदिग्ध दौरे को भांपते हुए केस का खुलासा कर दिया। कृषि विभाग का अधिकारी अंबिका के घर में घटना से आठ दिन पहले पहुंचा था। अंबिका के रिश्तेदार अधिकारी ने पुलिस को बताया कि उसने कीटनाशक दवाओं की 500 एमएल की दो बोतलें उन्हें दी थीं। अंबिका ने उनसे कहा था कि उन्हें अपने गार्डन के पौधों के लिए कीटनाशक की जरूरत है। 

आईजीपी केवी शरद चंद्र ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जहर की वजह से लोगों की मौत की खबर चर्चा में आते ही ऑफिसर ने अंबिका को बुलाया। इसके बाद आरोपी अंबिका ने कबूल किया कि उसने ऐसा मठाधीश के कहने पर किया था। बता दें कि अंबिका और स्वामी एक ही गांव के रहने वाले हैं और शादी के बावजूद वे दोनों आपस में संबंध में हैं। आईजीपी ने कहा, 'वारदात को किसने अंजाम दिया है इससे ज्यादा हमारी कोशिश थी कि यह पता लगाया जाए कि उन्होंने ऐसा क्यों किया है। हम एक बात के लिए तो आश्वस्त थे कि प्रसाद में जहर गलती से तो नहीं मिला था।

'1.5
करोड़ रुपये के प्रस्ताव को नहीं दी थी इजाजत'
बता दें कि तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा के मंदिरों में एक साल में 12 लाख रुपये राजस्व इकट्ठा होता है और हाल ही में इसकी पूरी जिम्मेदारी बागुर के स्थानीय लोगों ने ले ली है। मठाधीश की यह कोशिश थी कि वह मंदिर सेवा समिति के मुख्य ट्रस्टी चिनप्पी को प्रबंधन से बाहर करा दे। दरअसल, चिनप्पी ने मठाधीश को 1.5 करोड़ रुपये की कीमत से एक गोपुरा बनवाने के प्रस्ताव की इजाजत देने से मना कर दिया था और वह बिना उनकी सहायता के काम शुरू करने चले गए। 

एमएम हिल्स स्थित सलुर मठ में जब पुलिस पहुंची तो सहायक पुजारी (मठाधीश) इम्मदी महादेव स्वामी ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। आईजीपी केवी शरत चंद्र ने कहा कि मठाधीश चिनप्पी को ही दोषी ठहराते हुए कहने लगा कि जो कुछ भी हुआ है वह सही था। उसने कहा कि यदि जहर की वजह से 3-4 लोगों की मौत भी हो गई है तो उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं है। आईजीपी ने बताया, 'उसका (मठाधीश) मुख्य उद्देश्य मंदिर पर अपना अधिपत्य स्थापित करना था। उसने पहले भी वहां के चढ़ावे का दुरुपयोग किया था लेकिन इसके बाद 2017 के अप्रैल महीने में ट्रस्ट का गठन हो गया था, इसकी वजह से उसका प्रभाव सीमित हो गया।

गोपुरा की आधारशिला रखे जाने के मद्देनजर मंदिर प्रबंधन ने एक विशेष पूजा का आयोजन सुनिश्चित किया था, इस पर स्वामी ने निर्णय किया कि वह अपना बदला लेगा। पुलिस के मुताबिक, कार्यक्रम के दस दिनों पहले मठाधीश ने अपनी साजिश में अंबिका को शामिल कर लिया। जांच के दौरान सुलवाड़ी गांव के लोगों ने पुलिसकर्मियों को कृषि विभाग के अधिकारी के वहां पर आने की बात बताई। आईजीपी ने बताया, 'अधिकारी से पूछताछ की गई तो उसने अंबिका, मदेश और डोडैय्याह का नाम कबूला।

इस वारदात को अंजाम देने के लिए अंबिका ने अपने पति मदेश की मदद ली, जो कि मंदिर का मैनेजर है। मदेश ने इस खौफनाक साजिश में पड़ोस के मंदिर के पुजारी डोडैय्याह को भी शामिल किया। डोडैय्याह का चिनप्पी से मनमुटाव माना जाता है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, चिनप्पी से डोडैय्याह की बहस होने के कारण वह कई महीनों से किचगुठ मंदिर नहीं गया था। वह 14 दिसंबर को मंदिर में पहुंचा और तभी मदेश ने खाना बनाने वालों का ध्यान भटकाया, इस दौरान डोडैय्याह ने प्रसाद के लिए पकाए जा रहे 15 किलोग्राम चावलों में जहर उड़ेल दिया। 

खाना खाने से बीमार होने का बहाना कर खुद डोडैय्याह अस्पताल में भर्ती हो गया। डॉक्टरों और वहां के स्टाफ ने पुलिसकर्मियों को बताया कि डोडैय्याह को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। कुछ ब्लड टेस्ट भी किए गए हैं, जिसमें पाया गया है कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उसने पूछताछ के दौरान चिनप्पी को फंसाने की कोशिश की। इस पूरे मामले में बुधवार को हुए खुलासे के बाद चिनप्पी के बेटों (संतोष और लोकेश) ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके पिता का नाम साफ निकला है। 

आईजीपी शरत चंद्र ने बताया कि कुल 45 पुलिसकर्मियों (जिसमें 22 अधिकारी भी शामिल हैं) ने जांच की। उन्होंने कहा, 'हमने तमिलनाडु से टीम भेजी थी, जिसने तकरीबन 100 लोगों से चार दिनों में पूछताछ की। फरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद यह पुष्ट हो गया कि मंदिर में बने खाने में कीटनाशक मिलाया गया था, इसके बाद हमारी जांच की दिशा बदल गई।

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