श्री राम चरित्र मानस से सीखें मर्यादित आचरण का महत्व -पं उमा शंकर व्यास

बीबीसीखबर, कानपुरUpdated 29-12-2018
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 बीबीसी खबर: कानपुर

 

यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी मर्यादा का पालन करे तो समाज की अनेक समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जायेगा। श्री राम चरित्र मानस के अनेक पात्रों के चरित्र भी मर्यादित आचरण की सीख देते हैं। श्री प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला प्रांगण में आयोजित श्री राम कथा के समापन अवसर पर प्रख्यात कथा वाचक पं उमा शंकर व्यास ने शनिवार को श्री राम चरित्र मानस के अनेक  पात्रों द्वारा जीवन पर्यन्त मर्यादित आचरण के पालन की विस्तार से व्याख्या की।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम ,माता सीता ,श्री लक्ष्मण और श्री हनुमान जी ने जीवन की मर्यादा रेखा का जिस तरह पालन किया वो अद्भुत है। जब श्री परशुराम ने भगवान राम से पूछा कि तुम्हे मुझसे भी डर नहीं लगता। प्रभु ने कहा मुझे काल से भी भय  नहीं लगता। यदि काल मुझे ललकारे तो मै काल से भी लड़ जाऊं।

कथा व्यास जी ने कहा कि केवल छोटों के लिए ही मर्यादा रेखा पालनीय नहीं होती। बड़ों को भी मर्यादा का पालन करना चाहिए। तभी बड़े, छोटों को मर्यादा सिखा पाएंगे। जीवन की मर्यादा के संदर्भ में उन्होंने श्री हनुमान जी का संदर्भ लेते  हुए बताया कि वह खूब अच्छी तरह से मर्यादा का पालन करते हैं। अशोक वाटिका में जब उन्हें भूख लगती है तब भी वह मर्यादा का पालन करना नहीं भूलते। वह भूख लगने के बाद भी अपने मन से फल नहीं खाते अपितु माता सीता से फल खाने की आज्ञा  मांग लेते हैं। सीता जी ने भी बगिया के सुंदर फलों को मीठा बना कर खाने की विधि बता दी और आज्ञा देते हुए कहा ,"रघुपति चरन हृदय धरि तात मधुर फल खाहु। "रावण ने जब हनुमान जी से पूछा कि  तुमने मेरे बाग़ के फल   चोरी से क्यों खाये। हनुमान जी ने उत्तर दिया ,''खायेउ फल प्रभु लागी भूखा। ".भूखे को पेट भरने का अधिकार है। रावण ने पूछा कि तुमने रखवालों को क्यों मारा ,हनुमान जी ने कहा मैंने सबको नहीं मारा ,उन्हीं को मारा जिन्होंने पहले मुझे मारा। जब उनसे पूछा गया कि हिसाब बराबर हो गया ,हनुमान जी ने कहा नहीं एक हिसाब अभी बाकी है। तुम्हारे पुत्र ने मुझे बिना अपराध के बांधा  है ,इसका हिसाब शेष है। पं उमा शंकर व्यास ने कहा कि माता सीता भी प्रभु आज्ञा में बड़ी सावधानी से मर्यादा का पालन करती हैं वह भयभीत होकर उसका अनुगमन करती हैं। वन पथ में जाते समय भगवान के पीछे चलती हैं। वह यह चिंतन करते हुए चलती हैं की कहीं मेरे पैरों के पड़ने से प्रभु के चरणों से बनी आदर्श की रेखा मिट न  जाए। इसलिए वह प्रभु के दोनों चरण चिन्हों के बीच अपने चरण सावधानी से रखती हैं। वहीँ लक्ष्मण जी और भी अधिक भयभीत और सावधान है क्योंकि अब दोनों के चरण चिन्हों  के बीच इतनी जगह बची ही नहीं क़ि वह पैर रखकर चल सके। तब वह एक नया मार्ग निकालते हैं। यह त्रयी जब तक इस मर्यादा सीमा में चलती रही तब तक कोई विपत्ति नहीं आयी। जो भी समस्या  आयी उसका तत्काल समाधान हुआ। इसी मर्यादा की छोटी सी आधे सूत की रेखा को कालजयी रावण भी पार नहीं कर सका। 

 

 श्री राम कथा के समापन अवसर पर सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भीषण ठंड में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। चंदन तिवारी ,मानस तिवारी  ने भजन प्रस्तुत किये। कथा शुरू होने से  पहले व्यास पीठ का पूजन किया गया। व्यास पीठ का पूजन करने वालों में प्रमुख रूप से श्री प्रयाग नारायण मंदिर  शिवाला के अध्यक्ष  विजय नारायण तिवारी 'मुकुल',प्रबंधक अभिनव तिवारी ,राघव तिवारी ,डॉ अमित दुवेदी ,राजेश प्रसाद पांडे,मनोज सामवेदी ,संदीप तिवारी ,अरुण कुमार दुबे ,गीता तिवारी ,मनोरमा ,दीपा तिवारी, माया कुलश्रेष्ठ ,कामना तिवारी ,सुशीला वर्मा आदि शामिल रहीं। 

 

 

 

 

 

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