विजय शंकर की फिर हुई टीम इंडिया में वापसी

बीबीसीखबर, क्रिकेटUpdated 13-01-2019
विजय

  

बीबीसी खबर

 

हरफनमौला विजय शंकर को श्रीलंका में खेले गये निदाहस ट्रॉफी टी20 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के फाइनल में उस समय भारतीय प्रशंसकों की आलोचना झेलनी पड़ी थी जब वह मुस्ताफिजुर रहमान की गेंदों को समझने में विफल रहे थे, लेकिन 'मैच फिनिशर' के तौर पर उनकी उपयोगिता पर राहुल द्रविड़ के विश्वास जताने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और भारतीय टीम में उन्हें दूसरा मौका मिला।

 

तमिलनाडु का 27 साल का यह हरफनमौला ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे पर टीम का हिस्सा रहेगा। वह हार्दिक पांड्या की जगह टीम से जुडे़ हैं जिन्हें टीवी कार्यक्रम में महिलाओं को लेकर अनुचित टिप्पणी करने के कारण बीसीसीआई ने जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है।


पिछले साल फरवरी में बांग्लादेश टीम के शानदार गेंदबाजी आक्रमण के सामने बड़े मैचों में उनकी मानसिकता को लेकर सवाल उठे थे। शंकर ने पीटीआई से कहा, 'मुझे लगता है कि मानसिक तौर पर मैं ज्यादा मजबूत हुआ हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं करीबी मैचों को खत्म कर सकता हूं। भारत ए के न्यूजीलैंड दौरे ने मुझे मेरे खेल को अच्छे से समझने में मदद की।'


उन्होंने कहा कि ए टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने न्यूजीलैंड में उन्हें पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ। भारत के लिए पांच टी20 मैच खेलने वाले शंकर ने कहा, 'राहुल सर (द्रविड़) ने मुझे कहा था कि उन्हें मेरी मैच खत्म करने की क्षमता पर भरोसा है। मुझे लगता है कि पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करना मेरे खेल के अनुकूल है क्योंकि मैं दो मैचों में नाबाद रहा था।'


उन्होंने कहा, 'न्यूजीलैंड में 300 से ज्यादा का लक्ष्य का पीछा करते हुए मैंने 87 रन बनाए थे जिससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा। एक अन्य मैच में लक्ष्य का पीछा करते समय मैंने 60 रन बनाए थे। इन मैचों में मैं जब भी पांचवें क्रम पर बल्लेबाजी करने उतरा उस समय टीम को जीत के लिए 150-160 रन की जरूरत थी और यह जरूरी था कि मैं अच्छी पारी खेलूं और फिनिशर की भूमिका निभाउं।'


इस हरफनमौला खिलाड़ी ने कहा कि वह बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी पर भी बराबर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैं खेल के दोनों पहलुओं पर बराबर ध्यान देता हूं। विजय हजारे ट्रॉफी के ज्यादातर मैचों में मैंने अपने 10 ओवर के कोटा को पूरा किया। रणजी ट्रॉफी में भी इस सत्र में मैंने काफी गेंदबाजी की। सबसे अच्छी बात यह है कि मैंने जो मेहनत की है उससे अब मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत महसूस कर रहा हूं।'


पांड्या के टीम से बाहर होने के कारण शंकर को मौका मिला लेकिन उन्हें इस बात की परवाह नहीं। उन्होंने कहा, 'मैं विश्व कप और दूसरी चीजों के बारे में नहीं सोच रहा हूं। जब आप ऐसी बाते सोचते हैं तो खुल कर नहीं खेल सकते। मुझे तैयार रहना होगा और अगर मौका मिलता है तो उसे लपकना होगा।'

 

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