बीमार वृद्धा को जिंदा जलाने वाली बहू को आजीवन कारावास की सजा

बीबीसीखबर, छत्तीसगढ़Updated 03-02-2019
बीमार

 बीबीसी खबर

बीमार वृद्धा को जिंदा जलाने वाली बहू को जिला एवं सत्र कोर्ट ने शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी महिला की सास बीमार होने के कारण चलने में असमर्थ थी। इसके चलते बाड़ी में ही लघुशंका हो गई। इससे बहू आक्रोशित हुई और उसने केरोसिन डालकर वृद्धा काे जलाकर मार डाला था। 

1.    रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत शीश निवासी आरोपी संगीता टिकले (22) वर्ष, पति सुरेंद्र और सास बेदबाई पति हरिचरण (50) वर्ष एक साथ रहते थे। महिला की सास बेदबाई कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। इसके कारण वह पैदल चलने में असमर्थ थीं।

2.    28 नवंबर 2017 को संगीता टिकले घर पर काम में व्यस्त थी। उसकी सास बेदबाई आराम कर रही थी। महिला का पति किसी काम से बाहर गया था। दोपहर करीब 1.30 बजे बेदबाई को लघुशंका लगी, वह पैदल बाड़ी की ओर जा रही थी।

3.     

4.    तबीयत खराब होने के कारण वह ज्यादा दूर तक नहीं चल पाई। बाड़ी में लघुशंका कर कमरे में लौट आई। कुछ समय बाद उसकी बहू संगीता बाड़ी की तरफ गई। वहां लघुशंका पर नजर पड़ते ही वह गुस्से में आ गई। गाली-गलौज करते हुए सास के पास पहुंची।

5.     

6.    बाड़ी में बदबू आ रही है कहते हुए हाथ व मुक्के से सास की जमकर पिटाई कर दी। बेदबाई बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। संगीता रसोई गई और वहां से डिब्बे में रखे मिट्टी तेल को उसके ऊपर डाल दिया और माचिस की तीली जलाकर जला दिया।

7.     

8.    बेदबाई आग से पूरी तरह झुलस गई थी। कुछ समय बाद महिला का पति सुरेंद्र घर पहुंचा। दोनों ने बेदबाई को सिम्स में भर्ती कराया। सुरेंद्र ने अपनी बहन संगीता कोसले को फोन कर घटना के बारे में जानकारी दी। संगीता सिम्स पहुंची और अपनी मां बेदबाई से पूछा।

9.     

10. उन्होंने उसे बताया संगीता टिकले ने बाड़ी में लघुशंका करने के कारण मारपीट की, इसके बाद मिट्टीतेल डालकर जला दिया। इलाज के दौरान 3 दिसंबर 2017 को बेदबाई की मौत हो गई। मृतका की बेटी संगीता ने रतनपुर थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई। 

11.  

बेदबाई के इकलौते बेटे सुरेंद्र ने संगीता टिकले से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद घर में आए दिन विवाद होता रहता था। संगीता की आदत से परिजन परेशान थे। वह अपनी सास के साथ हमेशा दुर्व्यवहार करती थी। कई बार घर के बाहर दोनों के बीच विवाद हो चुका था। पड़ोसियों के समझाइश के बाद भी संगीता सास के साथ मिल जुलकर नहीं रहती थी। 

 

केस की सुनवाई के दौरान खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कोर्ट ने महिला को कई मौके दिए, लेकिन वह आरोप के संबंध में कुछ नहीं बोली। न ही उसने अधिवक्ता के माध्यम से कोई सबूत पेश करने का प्रयास किया। कोर्ट ने माना कि आरोपी के मौन रहने से उसकी निर्दोषता साबित नहीं होती। 

Follow Us