जुर्म करने वालो की शामत, पुलिस मात्र 3 सेकिंड में बता देगी कि अपराधी कौन है

बीबीसीखबर, देहरादूनUpdated 07-02-2019
जुर्म

 बीबीसी खबर

अब पुलिस मात्र 3 सेकिंड में बता देगी कि अपराधी कौन है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने प्रतिबिंब नाम का रिकग्नाइजेशन सॉफ्टवेयर जारी किया है। अब तक बिहार, पंजाब और तेलंगाना पुलिस अपराधियों की धरपकड़ में इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही थी।  

प्रदेश में अब लापता व्यक्ति, अज्ञात शव, पुराने या नए अपराधी की पहचान करना पुलिस विभाग के लिए मुश्किल काम नहीं रहेगा। एसटीएफ की ओर से जारी प्रतिबिंब साफ्टवेयर से पांच साल के भीतर हत्या, लूट, डकैती जैसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों का डाटा रहेगा।

                                                                                                                                    

इसके साथ ही माओवादी गतिविधियों में लिप्त आरोपी, हिस्ट्रीशीटर, गैंगेस्टर में निरुद्ध लोगों की जानकारी भी सॉफ्टवेयर में रहेगी। किसी भी संदिग्ध का फोटो साफ्टवेयर में लोड करने पर मात्र तीन सेकेंड में डेटा में मौजूद अपराधियों की फोटो से मिलान कर चता चल जाएगा कि यह चेहरा किसी अपराधी का है या नहीं।

इसे अपलोड करने में भी मात्र दो सेकेंड का समय लगेगा। एसटीएफ की सीसीटीएनएस टीम पूरे कुमाऊं में एसएचओ और एसओ को साफ्टवेयर संचालन का प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर थाने की पुलिस इसका इस्तेमाल करेगी।  
 

यह सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तर्ज पर इंसानी दिमाग की तरह काम करता है। डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर  फेस फीचर को मैच कर रिजल्ट देता है। शारीरिक ढांचे से भी किसी की पहचान हो सकेगी। इसमें वाइस सैंपल रिकॉर्ड करने की सुविधा भी है।


 
एसएचओ और उससे ऊपर के अधिकारी ही इस साफ्टवेयर में पांच साल तक के अपराधियों का डेटा अपलोड करेंगे। इसमें उन्हें अपराधियों का नाम, पता और फोटो अपलोड करना होगा। इसके बाद हर दरोगा के मोबाइल पर इसे लोड किया जाएगा। अभी तक एसटीएफ ने दस हजार अपराधियों का डाटा अपलोड किया है। अगले चार माह में करीब 40 हजार अपराधियों का डाटा तैयार हो जाएगा। 

डीआईजी रिधिम अग्रवाल ने बताया कि सॉफ्टवेयर की जांच के लिए एसटीएफ के एक इंस्पेक्टर का वर्तमान फोटो सॉफ्टवेयर में अपलोड किया गया। फिर उसी इंस्पेक्टर के 25 साल पुराने बचपन के फोटो को लोड किया गया। तीन सेकिंड में ही सॉटवेयर ने बचपन के चेहरे की पहचान वर्तमान के चेहरे के रूप में की।  

अपराधियों की पहचान के लिए प्रतिबिंब नाम से रिकग्नाइजेशन सॉफ्टवेयर जारी किया गया है। इसमें अपराधियों का डेटा अपलोड किया जा रहा है। डेटा लोड होने के बाद सभी थानों में इसका इस्तेमाल अपराधियों की पहचान और शवों की शिनाख्त के लिए होगा।

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