उच्चतम न्यायालय ने तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री का बंगला खाली करने का दिया आदेश

बीबीसीखबर, देशUpdated 08-02-2019
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उच्चतम न्यायालय ने बिहार में उपमुख्यमंत्री के लिये आरक्षित सरकारी बंगला खाली करने के आदेश के खिलाफ दायर राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने सरकारी बंगला खाली करने संबंधी पटना उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने पर तेजस्वी यादव पर 50,000 रूपए जुर्माना भी किया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने तेजस्वी यादव को आदेश दिया कि वह प्रतिपक्ष के नेता के लिये आबंटित अन्य आवास में स्थानांतरित हों। राजद के नेता तेजस्वी इस समय राज्य विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता हैं और उन्होंने इस याचिका में उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के लिये यह सरकारी आवास खाली करने के बिहार सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका सात जनवरी को खारिज कर दी थी। इससे पहले, छह अक्टूबर, 2018 को उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने भी उपमुख्यमंत्री के रूप में आबंटित बंगला खाली करने के राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी। एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता को सरकार में मंत्री के रूप में उसके पद के अनुरूप पटना में एक, पोलो रोड, बंगला आबंटित किया गया है। वह इस बारे में लिये गये फैसले पर सिर्फ इसलिए शिकायत नहीं कर सकते कि यह बंगला उन्हें अधिक माफिक आता है। इस समय यादव राजभवन और मुख्यमंत्री निवास से चंद कदमों की दूरी पर पांच, देश रत्न मार्ग बंगले में रह रहे हैं। यह बंगला उन्हें 2015 में उस समय आबंटित किया गया था जब वह उपमुख्यमंत्री थे।

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