अमेरिका में सजा-ए-मौत पा चुके एक मुस्लिम युवक को फांसी पर लटकाने से ठीक पहले उसकी सजा रोक दी गई

बीबीसीखबर, अमेरिकाUpdated 08-02-2019
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अमेरिका में सजा-ए-मौत पा चुके एक मुस्लिम युवक को फांसी पर लटकाने से ठीक पहले उसकी सजा सिर्फ इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसे मौत के चैंबर तक ले जाने के लिए इमाम की व्यवस्था कराने से इंकार कर दिया गया। मौत की सजा पर रोक लगाने वाली संघीय अदालत ने फैसला दिया कि मुस्लिम युवक के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है।

अटलांटा स्थित संघीय अपीली अदालत ने 42 वर्षीय डोमिनिक रे की मौत की सजा पर बुधवार को यह रोक लगाई। रे को 1995 में 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के लिए बृहस्पतिवार को सजा दी जानी थी। रे ने जेल में रहने के दौरान धर्मांतरण किया था। जजों ने अपने फैसले में कहा, ‘यहां संवैधानिक समस्या यह है कि राज्य ने नियमित रूप से ईसाई कैदियों की जरूरतों का प्रंबध करने के लिए सजा देने वाले कमरे में एक ईसाई पादरी की व्यवस्था की है। लेकिन यही लाभ एक सच्चे मुसलमान एवं अन्य सभी गैर ईसाईयों को देने से इनकार कर दिया गया।

अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन अधिकारियों को एक धर्म के ऊपर दूसरे धर्म को वरीयता देने से रोकता है और धार्मिक आजादी का अधिकार देता है। सजा की तारीख करीब आने पर जेल में धर्म बदलकर मुस्लिम बने रे ने चैंबर तक ले जाने के लिए इमाम की व्यवस्था करने के हक की मांग की। इस मांग को पूरा नहीं किए जाने पर रे के वकील ने अदालत में याचिका दायर की और सजा पर रोक हासिल कर ली। 

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