कल्पना परमार ने साबित कर दिया कि मन में दृढ़ विश्वास व जनून हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं

बीबीसीखबर, शिमलाUpdated 12-03-2019
कल्पना

 बीबीसी खबर

सोलन की इंटरनेशनल रनर कल्पना परमार ने एक बार फिर साबित किया है कि जब मन में दृढ़ विश्वास व जनून हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। कल्पना ने 12 घंटे का स्टेडियम रन करके हिमाचल का नाम नेशनल लेबल पर रोशन किया है।

टफमैन की ओर से चंडीगढ़ के ताऊ देवीलाल स्टेडियम पंचकूला में आयोजित स्टेडियम रन में 12 घंटे स्टेडियम रन किया। सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कल्पना परमार ने रन किया। ऐसा करने वाली कल्पना परमार प्रदेश की पहली ऐसी धावक बन गई है।

 

कल्पना परमार की 14 वर्षीय बेटी दीया कपूर ने भी 3 घंटे का स्टेडियम रन किया। कल्पना अपने साथ अपनी बेटी को भी धावक बना रही है। उनका कहना है कि युवाओं को अपनी सेहत प्रति जागरूक रहना चाहिए और रोज दौड़ लगानी चाहिए।

कल्पना का अगला लक्ष्य मोहाली में 31 मार्च को होने वाली 42 किलोमीटर की मैराथन को जीतने का है। इस बारे में कहती है कि इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है और जीत हासिल करूंगी। 45 साल की कल्पना उम्र को मात देकर आगे बढ़ रही है। जब मैदान पर वह दौड़ने लगती है तो पीटी उषा की याद ताजा कर देती है।

 

कल्पना सोलन के ब्वॉयज सीनियर सेकंडरी स्कूल में इतिहास विषय की लैक्चरर है। हाल ही में देहरादून में आयोजित नेशनल मास्टर गेम्स में कल्पना परमार ने 10 हजार मीटर में गोल्ड और दो रिले रेस में सिल्वर व ब्रांज मेडल जीता है।

उन्होंने कहा कि दौड़ के लिए कोई उम्र नहीं होती, जितना हो सकें रोज दौडऩा चाहिए ताकि हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।

 

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