15 सालों में 10 स्टूडेंट ने IIT कानपुर में किया सुसाइड, ज्यादातर हुए डिप्रेशन का शिकार; छात्रों की संख्या ज्यादा

बीबीसीखबर, कानपुरUpdated 26-04-2018
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 कानपुर.भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में बुधवार को एक छात्र ने हॉस्टल में फांसी लगाकर सुसाइड कर ली। मृतक छात्र की पहचान हरियाणा के फरीदाबाद जिले के भीम सिंह के रूप में की है। बीते 15 सालों में यहां 10 छात्रों ने सुसाइड किया है। जानकारों के अनुसार छात्रों के सुसाइड का प्रमुख कारण डिप्रेशन है। मनोचिकित्सक के अनुसार ज्यादातर स्टूडेंट ने सुसाइड उस वक्त किया जब मौसम में बदलाव आता है।

आईआईटी कानपुर में सुसाइड केस
-बीटेक के स्टूडेंट स्वप्निल भास्कर ने नवम्बर 2005 में तनाव की वजह से सुसाइड किया था। 
-बीटेक स्टूडेंट शैलेश शर्मा ने भी डिप्रेशन की वजह से अप्रैल 2006 में सुसाइड किया था। 
-बीटेक थर्ड ईयर स्टूडेंट जे भारद्वाज ने 27 अप्रैल, 2007 में ट्रेन के आगे कूद कर जान दी थी। 
-बीटेक फर्स्ट इयर स्टूडेंट प्रशांत कुमार ने 2008 अप्रैल में डिप्रेशन की वजह से सुसाइड किया था। 
-बीटेक स्टूडेंट जोया चटर्जी फाइनल परीक्षा में फेल हो गईं थी और उसने भी 2008 अप्रैल में सुसाइड किया था। 
-एम टेक स्टूडेंट जे सुमन ने जनवरी 2009 में सुसाइड किया था। 
-बीटेक फाइनल ईयर की स्टूडेंट माधुरी साले ने 2010 में सुसाइड किया था। 
-मैकेनिकल से पीएचडी कर रहे भीम सिंह ने 18 अप्रैल, 2018 को डिप्रेशन की वजह से सुसाइड किया।
क्या कहना है मनोचिकित्सक का?
- मनोचिकित्सक मनीष निगम के मुताबिक, जब मौसम में बदलाव होता है तो उसे चेंज ऑफ़ मौसम लेकिन इस मौसम को हम लोग अपनी भाषा में सुसाइडी मौसम कहते हैं। इस मौसम में बहुत ज्यादा सुसाइड के केस बढ़ जाते हैं।
- आईआईटी के छात्र के अलावा आम लोग भी मई के मौसम में भी सुसाइड करते हैं क्योंकि यह एग्जाम का समय होता है। इस मौसम में बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन रहता है जो दिमागी उलझन पैदा करता है।
- आज कल के बच्चों में बहुत ज्यादा महत्वकांक्षा बढ़ती जा रही है और उतनी ज्यादा सफलता नहीं मिल पा रही है। प्रतिस्पर्धा भी इतनी ज्यादा बढ़ रही है जिस कारण से छात्र डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं। सौ लोगों में से 10 दस लोग सुसाइड करने की सोचते हैं और 3 लोग सुसाइड कर लेते हैं।

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