युद्धक दवाएं’ बचाएगी जवानो की जान

बीबीसीखबर, देशUpdated 12-03-2019
युद्धक

  

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पुलवामा जैसे हमलों और युद्ध के मैदान में हताहत होने वाले जवानों की संख्या में कमी लाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने डीआरडीओ की मेडिकल लेबोरेटरी में युद्धक दवा या कॉम्बैट कैजुएलिटी ड्रग तैयार की है।

जम्मू-कश्मीर की मुश्किल जगहों से लेकर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के घने तथा दुर्गम जंगलों में आतंकियों और नक्सलियों से मुठभेड़ में जख्मी जवानों को तत्काल मेडिकल सुविधा नहीं मिल पाती। गंभीर रूप से घायल सुरक्षाकर्मियों में से 90 फीसदी कुछ ही घंटे में दम तोड़ देते हैं। 

इन हालात को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इस दवा को तैयार किया है जिससे घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले तक के बेहद नाजुक समय को बढ़ाया जा सकेगा। इसे घायल जवानों की जान बचाने के लिहाज से गोल्डनसमय कहा जाता है। 

वैज्ञानिकों ने बताया कि इन दवाओं में जख्म से खून के रिसाव को तत्काल रोकने वाली दवा, अवशोषक ड्रेसिंग और ग्लिसरेटेड सैलाइन शामिल हैं। ये सभी चीजें जंगल, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध और आतंकवादी हमलों की स्थिति में जीवन की रक्षा कर सकती हैं।

वैज्ञानिकों ने 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उन्होंने कहा कि इन दवाओं से हताहतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। 

डीआरडीओ की मेडिकल लैबोरेटरी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस में दवाओं को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार, घायल होने के बाद और अस्पताल पहुंचाए जाने से पहले यदि घायल को प्रभावी प्राथमिक उपचार दिया जाए तो उसके जिंदा बचने की संभावना बढ़ जाती है। 

डीआरडीओ में लाइफ साइंसेस के महानिदेशक एके सिंह ने बताया कि ये स्वदेश निर्मित दवाएं अर्द्धसैनिक बलों और रक्षा कर्मियों के लिए युद्ध के वक्त में वरदान हैं। उन्होंने कहा कि ये दवाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि जख्मी जवानों को जंग के मैदान से बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए ले जाने के दौरान खून बेकार में न बहे। 

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