पुलिस ने छापा मार एक खेत में व्यापक पैमाने पर अवैध तरीके से उपजाई गई अफीम की पकड़ी

बीबीसीखबर, जोधपुरUpdated 13-03-2019
पुलिस

 बीबीसी खबर 

पश्चिमी राजस्थान में अफीम और डोडा पोस्त के नशेड़ी इन्हें हासिल करने के लिए नित नए तरीके खोज रहे है। जालोर जिले के देवाड़ा गांव में बुधवार सुबह पुलिस ने छापा मार एक खेत में व्यापक पैमाने पर अवैध तरीके से उपजाई गई अफीम की उपज पकड़ी है। इस खेत में अफीम के करीब चालीस हजार पौधे मिले है। पश्चिम राजस्थान में यह पहला मामला है जिसमें इतने व्यापक स्तर पर अफीम की उपज सामने आई है। पुलिस के छापा मारते ही खेत मालिक कुइयाराम प्रजापत मौके से फरार हो गया।

बागरा थाना क्षेत्र के देवाड़ा गांव में अफीम की खेती करने की जानकारी पुलिस को मिली थी। इस पर आज सुबह तीन थाना क्षेत्र के करीब सौ पुलिस जवान व अधिकारियों ने एक साथ खेत पर छापा मारा। एक साथ व्यापक स्तर पर की गई अफीम की फसल देख पुलिस भी चौंक उठी। इस खेत में अफीम के चालीस हजार पौधे लगे मिले। पुलिस ने खेत मालिक के यहां से बड़ी मात्रा में सूखा व एकदम ताजा हरा डोडा बरामद किया है। 


पश्चिम राजस्थान में सदियों से सभी तरह के सामाजिक आयोजनों में अफीम की मनुहार होती रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में कोई भी आयोजन इसके बगैर नहीं होता। अफीम की बिक्री पर हमेशा से प्रतिबंध रहा है। जबकि अफीम के डोडो की पहले सरकार की तरफ से अधिकृत दुकानों के माध्यम से बिक्री की जाती थी। लेकिन चार बरस से यह बिक्री भी पूरी तरह से बंद कर दी गई। इसके बाद अफीम व डोडा का नशा करने वाले लोग पूरी तरह से तस्करों सी आपूर्ति पर निर्भर होकर रह गए।

 

तस्कर मध्य प्रदेश व उससे सटे राजस्थान के चित्तौड़ व प्रतापगढ़ से अफीम व डोडा लाकर यहां ऊंचे दामों पर बेचते है। लेकिन कुछ समय से पुलिस ने काफी हद तक तस्करों की नकैल कस रखी है। ऐसे में तस्करी के उत्पाद मिलना बहुत कम हो गए। इस कारण इनके दाम भी आसमान छूने लग गए। अच्छे दाम मिलने की लालच ने देवाड़ा के इस व्यक्ति ने व्यापक स्तर पर अफीम की खेती करना शुरू कर दिया। लेकिन इनकी महक ने उसकी पोल खोल कर रख दी। कुछ लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी।

 

उल्लेखनीय है कि अफीम की खेती करने के लिए केन्द्र सरकार की तरफ से परमिट जारी किए जाते है। परमिट में तय रकबे में ही अफीम की खेती की जा सकती है। साथ ही इसकी उपज पर सरकारी कारिन्दे पूरी नजर रखते है और पूरी उपज सरकार को ही बेची जा सकती है। बगैर परमिट कहीं भी इसकी खेती करना गैरकानूनी है। 
 

 

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