विश्व के सबसे प्रदूषित शहर कानपुर में हो रहा फर्जीवाड़ा

बीबीसीखबर, कानपुरUpdated 13-04-2019
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एक व्यक्ति ने एआरटीओ प्रशासन आदित्य त्रिपाठी से शिकायत की कि कुछ प्रदूषण जांच केंद्र बिना जांच के वाहनों के प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। इस पर एआरटीओ ने कहा कि यह उनकी जानकारी में है लेकिन कोई ठोस सबूत न मिलने के कारण प्रदूषण जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाते हैं।

इस व्यक्ति ने एआरटीओ को सबूत देने के लिए कहा। इसके बाद एक जांच केंद्र से थाने में महीनों से बंद ट्रक नंबर एमएच 46 एआर 6321 और बस नंबर यूपी 78 बीटी 0451 के प्रदूषण की जांच कर प्रमाणपत्र बनाने के लिए संपर्क किया।

केंद्र संचालक को बताया गया कि ट्रक और बस बाहर गए हैं। इसलिए जांच के लिए केंद्र पर नहीं ला सकते। केंद्र संचालक ने दोनों वाहनों की नंबर प्लेट की फोटो खींच कर लाने और दो सौ रुपये की डिमांड की। नंबर प्लेट की फोटो और दो सौ रुपये देने पर प्रदूषण नियंत्रित प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इन प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है।

प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख 11 अप्रैल 2019 लिखी है। वैधता की तारीख 10 अक्टूबर 2019 लिखी है। अब गौर करें, यह दोनों वाहन महीनों से कल्याणपुर थाने में विभिन्न कारणों से बंद हैं। दोनों प्रमाणपत्र की फोटो कॉपी एआरटीओ प्रशासन को दी गई है।


जिले में प्रदूषण जांच के लिए 35 केंद्रों को मान्यता मिली थी। जांच में अनियमितता मिलने, मौके पर बंद मिलने, मानक पूरे न करने पर 14 प्रदूषण जांच केंद्रों के लाइसेंस निरस्त/निलंबित कर दिए गए हैं। अब 21 प्रदूषण जांच केंद्र चल रहे हैं। बिना प्रदूषण की जांच के थाने में बंद वाहनों के जारी प्रमाणपत्रों पर बाला जी पर्यावरण समिति की मुहर लगी है। इस केंद्र के संचालक मुकेश गुप्ता हैं।

एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि मुकेश गुप्ता के तीन प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। यह श्रीबाला जी पर्यावरण समिति बर्रा विश्व बैंक कालोनी (केंद्र जूही में), बाला जी पर्यावरण समिति रेलवे लाइन स्वराज आश्रम सर्वोदय नगर और सोमदेव पर्यावरण समिति विनायकपुर हैं। 15 मार्च को बालाजी पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इस जांच केंद्र ने 7-8 भारी वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र जारी किए थे।

इनमें जांच का समय सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक लिखा था। नगर निगम के नियम के अनुसार सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक भारी वाहनों का प्रवेश शहर में नहीं हो सकता। समिति का दफ्तर आरटीओ दफ्तर के पास है। ऐसे में भारी वाहन शहर में आए ही नहीं तो जांच कैसे हो गई। इस नोटिस का जवाब नहीं मिला है। चार अप्रैल को सोमदेव पर्यावरण समिति को नोटिस दिया गया था। इसमें एक ही नंबर पर दो-दो वाहन के प्रदूषण जांच के प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए थे।


जिले में बढ़ते वाहन भी प्रदूषण का कारण हैं। इस समय जिले में 12 लाख 91 हजार 501 वाहन हैं। इसमें नौ लाख 81 हजार 755 मोटर साइकिल, स्कूटर, 34 हजार 685 मोपेड, एक लाख 98 हजार 863 कार, 13 हजार 894 कृषि काम के लिए ट्रैक्टर, 28 हजार 577 गुड्स कैरियर, एक हजार व्यावसायिक ट्रैक्टर, यात्री ढोने वाले थ्री व्हीलर 7057, सामान ढोने वाले थ्री व्हीलर 4667, बस 2026, मोटर कैब 2534 शामिल हैं।

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