वृद्ध की बात में शिक्षा ज्ञान के साथ-साथ अनुभव की परिपक्कता होती है

बीबीसीखबर, धर्मUpdated 04-05-2019
वृद्ध

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उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित श्री त्रिवटी नाथ मंदिर मे चल रही श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ में कथाऋषि श्री उमा शंकर व्यास जी ने बताया निषाद ने जब यह समाचार सुना कि श्री भरत सेना लेकर श्री राम के पास जा रहे है। तथा उन्हे लगा कि जो मनाने जायेगा वो सेना लेकर क्यों जायेगा निश्चित रूप से भरत श्री राम से युद्ध करने जा रहे है। तब उसने संकल्प किया कि जब तक मै जीवित हूँ तब तक इन्हे गंगापार नही उतरने दूंगा उसने ग्रांम वासियों को एकत्र किया और भरत से युद्ध के लिए उत्साहित किया किसी ने कहा कि क्या तुम्हे अपनी विजय का विश्वास है उसने कहा मृत्यु निश्चित है। यह तो मुझे विश्वास है। किन्तु मृत्यु के भय से हम बुराई (उन्मान) के विरूद्ध संघर्ष ही न करे यह तो अन्याय को बढ़ावा देना है। इसलिए मै युद्ध करूंगा और अपने स्वामी के जीवन सर्मपण करूंगा।

                                                                         

अचानक छींक हुई जिसमे कुछ नौजवान लोगो ने कहा कि लगता है। युद्ध में विजय होगी किन्तु एक बूढ़ा व्यक्ति बोल पड़ा की छीक का संकेत है कि भरत से मित्रता होगी निषाद ने कहा कि वृद्ध की बात को महत्व देना चाहिए क्योंकि वृद्ध की बात में शिक्षा ज्ञान के साथ-साथ अनुभव की परिपक्कता होती है। हमारे यहाँ कहा गया है कि वह सभा नही है जिसमें कोई वृद्ध न हो और वह वृद्ध नही जो न्याय संगत बात न कहे क्योंकि बिना सोचे समझे यदि आप ने जोश में आकर कोई अनुचित कदम उठा लिया और उसमे हानि हुई अथवा सामने वाले की पराजय हुई बाद में पश्चाताप के द्वारा उस हानि की पूर्ति नही की जा सकती हैं।

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