शान्ति भक्ति की खोज की प्राण का प्रारंम्भ राम नाम के आश्रय से ही होगा

बीबीसीखबर, धर्मUpdated 08-05-2019
शान्ति

 बीबीसी खबर; बरेली

श्री त्रिवटी नाथ मंदिर के अति पवित्र प्रांगण में अयोजित राम कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिवस में कथा ऋषि श्री उमाशंकर व्यास जी ने बताया की श्री सीता जी मूर्तिमती, शान्ति ,भक्ति तथा शक्ति है। श्री सीता जी के खोज की यात्रा हो रही है। उसमें श्री हनुमान जी सबसे पीछे चल रहे हैं। यद्पि समस्त गुणों में सबसे आगे है वे आगे रहने की प्रतिस्पर्धा में रूचि नही लेते है। इसका व्यवहारिक अभिप्राय यह है कि प्रतिस्पर्धा में उन्नति तो है परन्तु शान्ति नही कितना भी योग्य व्यक्ति हो कितनी भी तैयारी किन्तु यह चिन्ता लगी रहती है कि प्रतियोगिता में कही प्रतिंद्व्दी आगे न निकल निकल जाए दूसरी ओर शान्ति को पाने की इच्छा में उन्नति का त्याग करना पड़ता है।

यात्रा के प्रारम्भ में सारे बंदर शरीर से ऊपर उठ कर भोजन, पानी, निद्रा आदि का परित्याग कर देते है। किन्तु एक महीने के पश्चात शरीर ने अपना प्रभाव दिखाना प्रारंम्भ किया भूख प्यास से तड़पने लगे बहुधा देखा ये जाता है साधना प्रारंस्भिक काल में साधक की उत्साह की अधिकता में आहार, विहार,निद्रा आदि में संतुलित नही रह पाता है उसका परिणाम होता है कि आगे चल कर वह अंसतुलन ही बीमारी का स्वरूप ले लेता है ऐसा होना नही चाहिए एक महीने बाद बंदरो को भूख प्यास सताने लगी श्री हनुमान जी महाराज ने देखा तो उन्हे आश्चर्य हुआ कि इन लोगो को भूख भी लग रही है प्यास भी मुझे न भूख लग रही है न प्यास क्योंकी हनुमान जी राम नाम की मुद्रिका को मुख पर रख कर चल रहे थे। राम नाम अमृत है तथा राम नाम लड्डू भी है जो अमृत पीता हुआ चल रहा है जिसके मुख में लड्डू उसे भूख प्यास क्यों लगेगी सीधा सा तात्पर्य है कि शान्ति भक्ति की खोज की प्राण का प्रारंम्भ राम नाम के आश्रय से ही होगा।     

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