जीवन में केवल भगवत कृपा ही कार्य करती हैं

बीबीसीखबर, धर्मUpdated 09-05-2019
जीवन

 बीबीसी खबर; बरेली

श्री त्रिवटी नाथ मंदिर के नौवे दिवस की कथा में ऋषि श्री उमाशंकर व्यास जी ने बताया कि एक महीने की यात्रा के बाद बंदर वन में मार्ग भटक गए। संदेह ही जंगल हैं और इसका सीधा अभिप्राय है कि साधक साधन पथ में कई बार संदेह करने लगता हैं कभी गुरु पर, कभी ईष्ट पर, कभी साध्य पर कि जिस मार्ग में हम चल रहे हैं वह गलत तो नही हैं यद्पि संसय के उतपन्न होते ही व्यक्ति का पतन शुरु हो जाता हैं। किन्तु बंदरो के साथ ऐसा नही हुआ क्यों कि बंदरो का सौभाग्य है कि उनके साथ हनुमान जी जैसा संत हैं इसका सीधा सा अभिप्राय हैं कि संत हर परिस्थित में रक्षा कर लेता हैं। हनुमान जी बंदरो को भूखा प्यासा जानकर उनके भोजन की व्यवस्था में एक पर्वत पर चढ़ जाते हैं। वहाँ से उन्हे एक गुफा दिखाई देती हैं जिसमें जल के पक्षी भीतर जा रहे हैं। पक्षियें में तीन प्रकार के पक्षी हैं बगुला, चकवा और हंस । श्री हनुमान जी कहते हैं इस गुफा में जल के पक्षी जा रहे हैं इसका अभिप्राय हैं कि जल अवश्य हैं।  

व्यास जी ने बताया कि वस्तुत: ये गुफा भगवत कृपा की हैं कई बार भगवत कृपा का स्वरूप प्रत्यक्ष होता हैं । कई बार अप्रत्क्ष होते हुए भी जीवन में केवल भगवत कृपा ही कार्य करती हैं इस गुफा के भीतर बंदरो को दिखाई पड़ा कि यद्पि सूर्य का प्रकाश तो भीतर नही जा सकता था तथापि सैकड़ो सूर्य के समा जगमगा रही थी जैसे देवी स्वयं प्रभा वहाँ बैठकर तपस्या कर रही थी। नाम ही बहुत सुंदर हैं स्वंय प्रभा। स्वंय प्रभा का तात्पर्य है कि जिसे प्रकाश के लिए किसी वाह्य वस्तु के लिए आवश्यकता नही होती और वस्तुत: स्वंय प्रकाशित तो एक मात्र भगवत कृपा ही हैं। स्वयं प्रभा ने बंदरो से कहा कि आंख बन्द कर लो सीता जी प्राप्त हो जाएगी उनका तात्पर्य था कि अभी तक आप लोगो ने पुरूषार्थ के द्वारा खोजा अब विश्वास करके खोजो।

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