श्री राम नाम का साथ हो तो विष भी अमृत के समान लगता हैं

बीबीसीखबर, धर्मUpdated 08-06-2019
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 बीबीसी खबर

हावड़ा में वंशीधर स्मृति मंदिर में हो रही राम कथा में युग तुलसी सदगुरु देव श्री रामकिंकर महराज जी के वरिष्टतम सेवक श्री उमाशंकर व्यास जी ने बताया कि समुद्र मंथन में जब विष निकला तो श्री राम ने विष को शंकर जी के पास भेज दिया क्यो कि श्री राम जी जानते थे कि शंकर जी ही इस विष को पचा सकते हैं। देवता और दानव मेहनत कर रहे थे अमृत के लिए लेकिन निकत आया विष ठीक उसी प्रकार व्यक्ति मेहनत करता हैं सुख को पाने के लिए लेकिन दुख प्राप्त होता हैं।

व्यास जी ने बताया कि जब श्री राम जी ने शंकर जी को विष भेजा तो शंकर जी ने पूछा कि ये किसने भेजा हैं जब पता चला कि श्री राम ने भेजा हैं तो उन्होने विष का पान कर लिया। भेजने वाला कौन है ये महत्व रखता हैं, क्या भेजा हैं ये महत्व नही रखता हैं। लोगो  पूछा कि आपको विष पीने में डर नही लगा तो शंकर जी ने कहा कि बाहर विष हैं और मेरी जीभ में राम नाम है तो डर किस बात का। ठीक उसी प्रकार श्री राम को अपने जीवन का आधार मानते हुए मनुष्य को अपने जीवन में सुख आए या दुख दोनो का स्वागत करना चाहिए। 

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