भारतीय सेना में शामिल होगा 'विशेष सशस्त्र ड्रोन'

बीबीसीखबर, देशUpdated 09-06-2019
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लंबी चर्चा और कूटनीतिक बातचीत के बाद अमेरिका ने भारत को सशस्त्र ड्रोन बेचने को मंजूरी दे दी है। इस ड्रोन के आने से भारत की सामरिक शक्ति बढ़ेगी। भारत दुनिया का तीसरा और पहला गैर नाटो देश है जिसे अमेरिका का ये खास ड्रोन मिलेगा। इस खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच लगभग एक साल से बातचीत चल रही थी।

एक अधिकारी ने बताया कि ड्रोन की तकनीकी को लेकर बातचीत हो चुकी है। अब चर्चा केवल भारत द्वारा खरीदे जाने वाली ड्रोन की संख्या के निर्धारण पर केंद्रित होगी। अमेरिका के अलावा सशस्त्र ड्रोन यूनाइटेड किंगडम और इटली की सेना में कार्यरत है। ये दोनों देश नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के भागीदार हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले बिना हथियारों वाले 22 एमक्यू -9 गार्जियन ड्रोन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जून 2017 की वाशिंगटन यात्रा के दौरान ट्रंप के साथ हुई मीटिंग के बाद भारत को बेचने की मंजूरी दी थी। लेकिन, भारत हथियारों से लैस प्रिडेटर बी ड्रोन को खरीदने का इच्छुक था। इसलिए इस सौदे को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। 

इसके अलावा अमेरिका ने भारत को अपने टर्मिनल डाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस और पैट्रियाट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को खरीदने की पेशकश की थी। लेकिन, भारत ने रूसी एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को तरजीह दी। इस सौदे की अनुमानित कीमत पांच बिलियन डॉलर है।

इससे पहले अमेरिका ने चीन द्वारा रूसी एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद करने पर अपने काट्सा एक्ट के द्वारा प्रतिबंध लगा दिया था। जबकि तुर्की को भी इसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद के कारण अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट अब नहीं मिलेगा। 

हाल में ही भारत ने अमेरिका से कई रक्षा समझौते किए हैं जिसमें अपाचे, चिनूक और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर, पी-8 आर समुद्री निगरानी विमान, एम 777 हॉवित्जर गन शामिल हैं। दोनों देशों की सेनाएं कई सैन्य युद्धाभ्यास साथ में कर रही हैं। 

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