मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बना रहा आपको बीमार

बीबीसीखबर, फिटनेसUpdated 12-07-2019
मोबाइल

 बीबीसी खबर

 

फोन का अविष्कार मानव जीवन के लिए बड़ी उपलब्धि है लेकिन हर चीज के दो पहलू होते हैं। उसी तरह फोन भी लोगों के लिए काम की चीज होने के साथ-साथ बर्बादी की वजह भी है। फोन के लगातार इस्तेमाल से लोगों की जीवनशैली पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इतना ही नहीं फोन ना सिर्फ खराब स्वास्थ्य की वजह बनता जा रहा है बल्कि जानलेवा भी साबित हुआ है। स्मार्टफोन की लत को नोमोफोबिया कहते हैं। 

नोमोफोबिया इस बात का डर है कि कहीं फोन खो न जाए या आपको उसके बिना न रहना पड़े। एडोब के एक अध्ययन में सामने आया है कि देश के अधिकांश युवा इस फोबिया से ग्रसित हैं। 10 में से लगभग तीन व्यक्ति लगातार एक साथ एक से अधिक उपकरणों का उपयोग करते हैं और अपने 90 प्रतिशत कार्य दिवस उपकरणों के साथ बिताते हैं। 

अध्ययन के निष्कर्ष कहते हैं कि 50 प्रतिशत उपभोक्ता मोबाइल पर गतिविधि शुरू करने के बाद फिर कंप्यूटर पर काम शुरू कर देते हैं। भारत में इस तरह स्क्रीन स्विच करना आम बात है। मोबाइल फोन का लंबे समय तक उपयोग गर्दन में दर्द, आंखों में सूखेपन, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और अनिद्रा का कारण बन सकता है। 20 से 30 वर्ष की आयु के लगभग 60 प्रतिशत युवाओं को अपना मोबाइल फोन खोने की आशंका रहती है। 

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार फोन और कंप्यूटर पर आने वाले नोटिफिकेशन, कंपन और अन्य अलर्ट हमें लगातार उनकी ओर देखने के लिए मजबूर करते हैं। हम लगातार उस गतिविधि की तलाश करते हैं और इसके अभाव में बेचैन, उत्तेजित और अकेला महसूस करते हैं। 

तकनीक का समझदारी से करें उपयोग 
-स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार आपका ध्यान फोन की नोटिफिकेशन बीप बजने पर नहीं जाएगा। 

-दिन के कुछ घंटे आप अपना डाटा बंद रखें यानी कि इंटरनेट बंद रखें। इससे आपका बार-बार फोन नहीं देखेंगे और बैटरी की भी बचत होगी।

-अपने फोन को चेक करने का समय निश्चित करें, उसी दौरान आप सभी अपडेट्स देख लें। 

-सुबह उठते ही कुछ घंटे फोन से दूर रहें और रात को सोने के कुछ घंटे पहले ही फोन को दूर रखें।

-जब आप फोन से थोड़ी दूरी बनाकर चलेंगे तो अपने आप ही आपका मन दूसरे कामों में लगेगा।

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