ड्रग विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को एक साथ पूरे प्रदेश में छापे मारे

बीबीसीखबर, जयपुरUpdated 10-08-2019
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  बीबीसी खबर

प्रदेश में ऑनलाइन दवाइयों में नकली दवाएं बेचे जाने का मामला सामने आया है। ड्रग विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को एक साथ पूरे प्रदेश में छापे मारे। जयपुर में 37 लाख रुपए से अधिक की नकली दवाएं जब्त भी कीं। ये नकली दवाएं जयपुर के अलावा पूरे राजस्थान में भेजी जा रही हैं। 10 जिलों में इन दवाओं के बड़े बाजार की जानकारी सामने आई है।

देर रात तक सीकर, झुंझुनू, अलवर, जोधपुर, भरतपुर, हनुमानगढ़, नागौर, दौसा और करौली में भी नकली दवा पर छापेमारी जारी थी। जयपुर में 8 टीमों ने 10 जगह छापे मारकर ऑनलाइन नकली दवा बेचने के बड़े गोरखधंधे का खुलासा किया है। 80 दवाओं के सैंपल लिए हैं। खास बात, जो दवाएं हार्ट डिजीज में काम आती हैं, उसी की नकली दवाएं बाजार में बिक रही है।


ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया- सूचना मिली कि शहर में कई जगह नकली दवाएं बेचे जाने का काम चल रहा है। इसके बाद टीम ने अपने स्तर पर पड़ताल की और  शुक्रवार को दस टीमों के साथ छापा मारा। फिल्म कॉलोनी की दर्श फार्मा और वृंदावन फार्मा, कालवाड़ स्कीम की सनशाइन एंटरप्राइजेज, सुदर्शनपुरा की थीया टेक्नोलोजिस और मेडि लाइफ इंटरनेशनल प्रा.लि., काेटपुतली में यूनाइटेड मेडिकल एजेंसी, वीकेआई में अग्रवाल स्टोर्स और 22 गोदाम स्थित एपिओन मेड आरएक्स फार्मेसी पर कार्रवाई की।

इन सभी जगहों से एट्रोवेसटाटीन टेबलेट, रेमीप्रील, ल्यूपिन फार्मा, यूरिमेक्स डी टेबलेट, सिपला, डुफास्टोन, अबोट की दवाएं संदेहास्पद पाई गई हैं और काफी मात्रा में ऑनलाइन बेची जा रही थी। सुदर्शनपुरा में टीम जब कार्रवाई कर रही थी, फर्म का गार्ड बाहर से गेट बंद कर गया।

फिल्म कॉलोनी स्थित मैसर्स दर्श फार्मा

यहां नकली दवा लोसार एच का बेचान सामने आया। यहां से सीकर, झुंझुनू, अलवर, जोधपुर, भरतपुर, हनुमानगढ़, नागौर, दौसा और करौली, उदयपुर, भीलवाड़ा सहित लगभग सभी जिलों में यह दवा बेची जा रही थी। यहां करीब 37 लाख रुपए की दवा जब्त की है। जांच में सामने आया है कि दर्श फार्मा दिल्ली के गणपति एंटरप्राइजेज से माल खरीद रहा था। मामले में दिल्ली के ड्रग कंट्रोलर को सूचित कर दिया गया है और शनिवार को वहां भी कार्रवाई की जाएगी।


टीम को बंधक बनाया, बताया- गार्ड की गलती थी 
टीम जयपुर के सुदर्शनपुरा स्थित थीया टेक्नोलोजिस में कार्रवाई के लिए पहुंची। यहां जैसे ही टीम बेसमेंट में गई, फर्म के सिक्योरिटी गार्ड ने ड्रग विभाग की टीम जहां कार्रवाई कर रही थी, उस कमरे को बाहर से बंद कर दिया। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। तब पता चला कि बंधक नहीं बनाया गया, गार्ड ने भूलवश कमरे को बाहर से लॉक कर दिया था, जिसे बाद में खोल दिया गया।


ऑनलाइन कॉम्पीटिशन में नकली दवा से कमाई
किसी भी कंपनी की दवा बेचने पर रिटेलर को 16% और हॉलसेलर को 10% कमीशन ही मिलता है। जबकि, ऑनलाइन कंपनियां 20% फायदा तो ग्राहक को ही दे देती हैं। ऐसे में नकली दवा कमाई का जरिया बन गया है।

 

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