रणनीति में माहिर और अमित शाह के हैं भरोसेमंद, नड्डा आज संभालेंगे BJP की कमान

बीबीसीखबर, दिल्लीUpdated 20-01-2020
रणनीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भरोसेमंद जेपी नड्डा चुनाव प्रबंधन की रणनीति में माहिर माने जाते हैं. जेपी नड्डा मोदी सरकार में स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं. पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत की सफलता का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है. पिछले करीब आठ महीनों से कार्यकारी अध्यक्ष का काम-काज संभाल रहे नड्डा ने पार्टी के अंदर कई जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया है. अब वह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP की कमान संभालेंगे.


संगठन चुनाव की औपचारिकता पूरी करने के लिए आज बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी होगा, लेकिन कोई दूसरा उम्मीदवार ना होने की वजह से जेपी नड्डा निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए जाएंगे. जेपी नड्डा के समर्थन में 21 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी राधा मोहन सिंह के सामने जमा करेंगे. जिन राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष जेपी नड्डा के समर्थन में नामांकन पत्र प्रस्तुत करेंगे, उनमें दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य शामिल हैं.


जेपी नड्डा बीजेपी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. जेपी नड्डा छात्र राजनीति के दौरान एबीवीपी से जुड़ने और उसके बाद बीजेपी के युवा मोर्चा से होते हुए हिमाचल की राजनीति में सक्रिय हुए और उसके बाद विधायक और मंत्री भी बने 2010 में वह राष्ट्रीय राजनीति में आए, जब नितिन गडकरी ने उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया.


जेपी नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 में पटना बिहार में हुआ था. इनके पिता नारायण लाल नड्डा पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. नड्डा ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा बिहार में आरम्भ की स्नातक पटना विश्वविद्यालय से पूरी की. उन्होंने पटना में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् में सक्रिय होकर कई छात्र आंदोलन और उस समय चल रहे साल 1975 के जय प्रकाश नारायण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई.


हिमाचल विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढाई करते हुए नड्डा 1983 में हिमाचल विश्वविद्यालय छत्र संघ के अध्यक्ष चुने गए. 1984 में हिमाचल प्रदेश में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्वकालीन कार्यकर्ता के रूप नड्डा ने एबीवीपी के संगठन मंत्री का काम किया. साल 1985-89 तक नड्डा दिल्ली में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पुरकालीन कार्यकर्ता के रूप में संगठन मंत्री रहे. दिल्ली में अनेक छात्र आंदोलन का नेतृत्व करते हुए नड्डा ने राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा के माध्यम तत्कालीन राजनीतिक स्थितियों में बदलाव का नेतृत्व किया. इसके बाद 1989 में नड्डा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री के रूप ज़िम्मेदारी निभाई.

 

साल 1990 में बीजेपी में संगठन मंत्री की ज़िम्मेदारी के साथ हिमाचल प्रदेश भेजे गए.  1991 में नड्डा को भारतीय जनता युवा मोर्चा में राष्ट्रीय अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी मिली और तत्कालीन अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में कार्य करते हुए तिरंगा यात्रा में युवाओं के साथ रहे. साल 1993 में नड्डा पहली बार बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश से विधायक चुने गए और हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने. साल 1998-2003 में नड्डा फिर विधायक चुने गए और हिमाचल प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में स्वास्थय और परिवार कल्याण और संसदीय कार्य मंत्रालय का कार्यभार संभाला .

 

साल 2007 में नड्डा तीसरी बार विधायक चुने गए और वन एवं पर्यावरण, विज्ञानं व प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री रहे. 2010 में मंत्री परिषद् से त्याग पत्र देकर नड्डा बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बने. तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की टीम के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए केंद्रीय कार्यालय प्रभारी और अनेक राज्यों के प्रभारी और चुनाव प्रभारी रहे. साल 2012 में नड्डा हिमाचल से राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. साल 2013 में नड्डा राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में फिर राष्ट्रीय महामंत्री चुने गए. 2014 में नड्डा केंद्रीय चुनाव प्रबंध समिति के सदस्य रहे और 2014 में अमित शाह के नेतृत्व में नड्डा पार्टी की सर्वोच्च समिति संसदीय दल के सचिव सदस्य और राष्ट्रीय महामंत्री चुने गए. नवंबर 2014 में उन्होंने स्वास्थय मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला. संगठनात्मक कार्य की दृष्टि से नड्डा ने अनेक प्रदेशों के प्रभारी और चुनाव प्रभारी के रूप में कार्य किया. जिसमें जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल और उत्तर प्रदेश प्रमुख रूप से है.

 

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