पहली बार एवरेस्ट की 5 हजार मीटर ऊंचाई पर होगा फैशन शो

बीबीसीखबर, स्पॉटलाइटUpdated 21-01-2020
पहली

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पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दुनिया में पहली बार माउंट एवरेस्ट बेस कैंप के ऊपर 5,644 मीटर की ऊंचाई पर इंटरनेशनल फैशन शो होगा। 26 जनवरी को होने वाले इस शो में मॉडल्स माइनस 40 डिग्री तापमान में सिर्फ 25% ऑक्सीजन की मौजूदगी में रैंप वॉक करेंगी।

 

इस दौरान वे ऐसे परिधानों और जूतों का प्रदर्शन करेंगी, जो जमीन में कुछ ही माह में पूरी तरह से गल जाएंगे। यही नहीं, आईआईटी दिल्ली की मदद से तैयार किए गए वाटर लेस स्प्रे का इस्तेमाल कर करीब 8 हजार लीटर पानी भी बचाएंगी। यह फैशन नेपाल और भारत मिलकर कर रहे हैं। इसमें 12 देशों की 17 मॉडल्स हिस्सा ले रही हैं। इस फैशन शो में 245 मॉडल्स ने हिस्सा लेने के लिए आवेदन किया था। एवरेस्ट की ऊंचाई के हिसाब से मेडिकल और फिटनेस में अधिकांश मॉडल्स पास नहीं हो पाईं। चुनी गई 17 मॉडल्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए 140 किमी का सफर ट्रैकिंग के जरिए तय करना होगा। 

 

रविवार 19 जनवरी से यह ट्रैंकिंग शुरू हो गई है। सभी मॉडल्स रोज 7 घंटे की ट्रैकिंग कर दिनभर में 19 किमी का सफर तय कर रही हैं, ताकि 25 जनवरी तक वे वेन्यू तक पहुंच सकें। इन्हें दो महीने पहले मसल्स क्रैंप, अल्टीट्यूड सिकनेस, तेज न चलने, कार्डियो जैसी 18 तरह की ट्रेनिंग दी गई थी। शो के आयोजक भारत के डॉ. पंकज गुप्ता और नेपाल के रीकेन महाजन ने बताया कि सबसे ऊंचाई पर होने वाले इस शो को रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए गिनीज बुक की टीम भी मौजूद होगी। एवरेस्ट की राह पर हर मॉडल के हाथ में कचरा बटोरने के लिए बैग दिया गया है। वे ट्रैंकिंग के दौरान रास्ते का कचरा उठाती चल रही हैं। सोमवार को ये सभी मॉडल्स करीब साढ़े तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर नेमचे तक पहुंच गई। शो में मॉडल्स द्वारा पेश किए जाने वाले परिधान पश्मीना और ऊन के फैब्रिक फेल्ट से बनाए गए हैं, जो बायोडिग्रेडेबल हैं। प्रायोजक कंपनियों ने हरेक माॅडल पर करीब 10 लाख रुपए का खर्च कर कई नए तरह के परिधान तैयार किए हैं।


शो में सभी मॉडल्स को एक डिवाइस दी गई है, जो ट्रैकिंग के दौरान कार्बन उत्सर्जन की गणना करेगी। यह डिवाइस सॉफ्टवेयर से जुड़ी होगी। मॉडल्स के घर से निकलने से लेकर एवरेस्ट की चढ़ाई और वापस काठमांडू एयरपोर्ट पहुंचने तक उन्होंने जितना कार्बन उत्सर्जन किया होगा, उसके हिसाब से उन्हें पौधे लगाने होंगे। ये पौधे भारत के पुडुचेरी की ओरोविले संस्था की ओर से दिए जाएंगे।

 

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