स्वामी की सेवा ही जीवन का उद्देश्य होना चाहिए

बीबीसीखबर, धर्मUpdated 11-02-2020
स्वामी

 बीबीसी खबर; कानपुर

कानपुर के गौशाला में स्थित साईं मंदिर में हो रही श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें में दिवस की कथा में मानस मर्मज्ञ कथा ऋषि श्री उमाशंकर व्यास जी ने बताया कि एक झांकी युद्ध से पहले बनी और दूसरी झांकी अयोध्या में राम राज्य की स्थापना के पश्चात, ऐसी ही बनी दोनों में समानता तथा विविधता भी हैं। एक और यदि सुग्रीव की गोद में अपना सिर रखकर प्रभु लेटे हैं तो दूसरी ओर भरत जी की गोद में, महाराज जी कहते हैं कि जैसे शरीर में सिर सबसे ऊपर और अधिक महत्व रखता है वैसे ही एक और जहां सुग्रीव की गोद को प्रभु सिर के लिए स्वीकारते हैं वहीं दूसरी ओर वे श्री भरत को तथा उनके प्रेम और त्याग को महत्व देते हुए वाटिका की झांकी में अपना सिर भरत की गोद में रखते हैं। कथा ऋषि कहते हैं कि यह झांकी प्रभु की लीला की मानस में वर्णित अंतिम झांकी है।

मानस मर्मज्ञ उमाशंकर व्यास जी कहते हैं कि मानस में वर्णित अनेक भावों के चरित्र की चर्चा करते हुए बताते हैं कि माताओं में कौशल्या के चरित्र एवं सुमित्रा के चरित्र में बड़ी अद्भुतता है जहां प्रत्येक माँ अपने पुत्र को राजा महाराजा बनाने की चेष्टा करते हैं वहीं सुमित्रा ने अपनें सभी पुत्रों को सिखाया है कि स्वामी की सेवा ही जीवन का उद्देश्य है सेवा धर्म को स्वीकार करके कोई सुख चाहता है तो वह आकाश पुण्य कामना करता है।

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