संयुक्त राष्ट्र ने कहा- ग्लोबल इकोनॉमी में आएंगी मंदी, जानिये भारत में क्या होगा असर ?

बीबीसीखबर, देशUpdated 31-03-2020
संयुक्त

 बीबीसी खबर; नई दिल्ली

कोरोना का असर पूरे विश्व में है। कोरोना संक्रमण के चलते भारत सहित कई देशों में आयात निर्यात पूरी तरफ ठप्प पड़ा है। उद्योगों में ताल पड़ गया है। भारत सहित कई देशों में रोजाना हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इन हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस साल मंदी झेलनी पड़ेगी। क्योंकि, कोरोनावायरस की वजह से बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है। इससे विकासशील देशों को ज्यादा मुश्किलें होंगी। हालांकि, यूएन ने कहा है कि इससे भारत और चीन पर पर असर न पड़ने की उम्मीद है। यूएन ने इसकी वजह नहीं बताई कि वैश्विक मंदी से भारत और कैसे बचेंगे?

संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की दो तिहाई आबादी विकासशील देशों में रहती है। इन देशों को कोरोनावायरस के संकट की वजह से बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इनके लिए 187.50 लाख करोड़ रुपए के रेस्क्यू पैकेज की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के बाद दूसरे देशों में कोरोनावायरस के फैलने के बाद से पूंजी के निकलने, करेंसी की वैल्यू गिरने, निर्यात में कमी और कमोडिटी की कीमतों में कमी आ रही है। टूरिस्ट की कमी आने से टूरिज्म और एयरलाइंस सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। वायरस से लड़ने में मोनैटरी, फिस्कल आैर प्रशासनिक क्षमता की कमी के कारण महामारी बढ़ती जा रही है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की तरफ ले जाएगी। इस कारण सस्टेनबल डेवलपमेंट लक्ष्य को प्राप्त करने में मुश्किल आएगी। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले दो साल में एक्सपोर्ट करने वाले देशों में विदेशी निवेश 150 लाख करोड़ रुपए से 225 लाख करोड़ रुपए तक घट सकता है। हाल के दिनों में विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों ने बड़े पैकेज घोषित किए हैं। जी-20 के मुताबिक ये देश आने वाले दिनों में इकोनॉमी के लिए सपोर्ट को 375 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ाएंगे।विकसित देशों के सामने भी असंगठित क्षेत्र के वर्कफोर्स की समस्या
विकसित देश भी असंगठित क्षेत्र के वर्कफोर्स की समस्याओं को सुलझाने में मुश्किल झेल रहे हैं। विकासशील देशों के सामने यह समस्या और भी बड़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित अर्थव्वस्थाएं ने कहा है कि कंपनियों और लोगों को भारी नुकसान से बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वे पीछे नहीं हटेंगी। विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने इससे लड़ने के लिए पिछले कुछ समय में भारी-भरकम पैकेज घोषित किए हैं। 

 

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