पुलिस की मेहरबानी- तश्करी में पकड़ी गई शराब, बाजार में बेचने के लिए उतारी

बीबीसीखबर, करनालUpdated 14-05-2020
पुलिस

 नारनौल।

अगर पुलिस की कृपा हो जाए हो तो मिट्टी भी सोना के रेट में बेंचा जा सकता है। लॉकडाउन में सोनीपत के बाद अब नारनौल में शराब तस्करी का मामला सामने आया है। यहां 4 साल पहले पकड़ी गई करीब 10 लाख रुपये कीमत की शराब को 5 महीने पहले नष्ट किया गया था। वह शराब कितनी और कैसे डिस्ट्रॉय की गई, इसकी जानकारी किसी को नहीं, पर इतना जरूर है कि उसी ब्रांड की 30 पेटी शराब एक गाड़ी में शहर की एक कॉलोनी में गाड़ी से बरामद की गई। इस मामले की जब गहन पड़ताल की गई तो विभाग के 2 कर्मचारियों को निलंबित कर 14 दिन के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। 

शराब नष्ट करने वाली कमेटी में शामिल सदर थाना एसएचओ और ड्यूटी मजिस्ट्रेट पर कोई कार्रवाई नहीं

दूसरी ओर जिस कमेटी को शराब नष्ट करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसमें शामिल सदर थाना के एसएचओ और ड्यूटी मजिस्ट्रेट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मामले की जांच हुई तो जिले के कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। इस मामले में एसपी का कहना है कि प्राथमिक जांच में फिलहाल उन दो कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जिन पर शराब की संभाल करने का जिम्मा था। अब मामले की पूरी पड़ताल के लिए एसआई गठित की जाएगी।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को नारनौल शहर के केशव नगर गली नंबर-3 में सिटी पुलिस ने एक पिकअप गाड़ी से 30 पेटी अंग्रेजी व 10 पेटी देसी अवैध शराब बरामद की थी। इस मामले में जब पड़ताल शुरू हुई तो पता चला कि यह वह शराब है, जो वर्ष 2016 में 23 जुलाई को पुलिस ने नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव शहबाजपुर में एक कैंटर से बरामद की थी। उस समय कैंटर आरजे 18-जी-ए 9144 के बारे में जानकारी मिली थी कि महेंद्रगढ़ की तरफ से आ रहा यह कैंटर राजस्थान जा रहा है। 

मादी नदी के नजदीक नाका लगाकर इसे पकड़ने का प्रयास किया गया तो वह वहां से भेडंटी की तरफ चला गया। बाद में उसे शहबाजपुर में पकड़ा गया। तब उस शराब की डील में सुरेंद्र दोंगली का भी नाम सामने आया था। पुलिस ने कैंटर से मैकडोल कंपनी की 50, सिग्नेचर की 22, रॉयल चैलेंज की 198, चैम्सफोर्ड की 165 और बीयर की 289 पेटियां बरामद की थी। तब इस पकड़ी गई शराब को पुलिस लाइन नारनौल में लाकर सील किया गया था। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तब इस पर मुकदमा नंबर-208 के तहत सुरेंद्र दौंगली, गाड़ी चालक व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। बाद में मांगेराम पुत्र पूर्णचंद उलसिया उदयपुर राजस्थान और अरविंद पुत्र सतेंद्र श्योपुरा चिड़ावा राजस्थान के नाम सामने आए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने पकड़ा भी थी।

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