उत्तर प्रदेश सरकार के छवि सुधार में सपा को मौके की तलाश

बीबीसीखबर, लखनऊUpdated 23-07-2020
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 उत्तर प्रदेश सरकार अपनी छवि मजबूत करने के लिए एक ओर जहां पीआर कंपनी नियुक्त करने की कवायद में जुटी है, तो वहीं विपक्ष भी प्रच्छन्न रूप से अपना खेल खेलने की जुगत भिड़ा रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश में समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता ने दिल्ली की एक एजेंसी के हक में फैसला लेने की सिफारिश सूचना विभाग तक पहुंचा दी है। दिल्ली की इस कम्पनी ने टेंडर प्रक्रिया में स्थिति मजबूत करने के लिए अपनी एक बी टीम को भी मैदान में उतार दिया है ताकि उसकी संभावनाएं बढ़ जाएं।

 
इतना ही नहीं यह खेल इस कदर खेला जा रहा है जिसमे शह और मात दोनों एक ही कंपनी के हाथ में देने की तैयारी चल रही है। कहने को टेंडर के लिए चार कंपनियों ने हाथ आजमाया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में तैर रही है उसका रूख दिल्ली की कंपनी की तरफ ही जा रहा है। यही नहीं इस कंपनी ने मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया का काम देख रही कंपनी को भी अपने घेरे में ले लिया है। यह तय हुआ है कि अगर टेंडर दिल्ली वाली कंपनी को मिलता है तो दिल्ली का काम यह संभालेगी। यानि अगर टेंडर किसी दूसरी कम्पनी को भी मिला तो उसमें भी फायदा इसी कंपनी को ही होगा। यह बंदरबांट बड़े पैमाने पर हो रहा है।
 
पूरा खेल यह है कि दिल्ली की कम्पनी योगी सरकार के साथ पीआर की प्रैक्टिस करेगी और असली मैच अगली सरकार के लिए खेलेगी। समाजवादी पार्टी को शायद यह भरोसा है कि आने वाले समय में यूपी में अखिलेश के नेतृत्व की सरकार होगी और ऐसे में सोशल मीडिया और पीआर दोनों इसी कंपनी के हाथ में थमा दिया जाएगा। आलम यह है कि सरकारी तंत्र के मोहरे ही मिलीभगत कर अफसरों की शह पर मौजूदा सरकार की साइकिल पंचर करने में जुट गए हैं। पर बड़ा सवाल यह भी है कि मुंबई की जो कम्पनी समाजवादी सरकार में पीआर का काम संभालती थी आने वाले समय में उसकी भूमिका क्या होगी।

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