गांव में लगा गंदगी का अंबार ग्रामीणों में आक्रोश, धरातल की सच्चाई से कराते है रूबरू

बीबीसीखबर, बांदाUpdated 24-07-2020
गांव

 बाँदा मुख्यालय से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ब्लॉक जसपुरा अन्तर्गत ग्राम पंचायत कानाखेड़ा  की जमीनी हकीकत से आपको हम रूबरू कराते है । भले ही केन्द्र व राज्य की सरकारें यह दम भर रही हो कि ग्राम पंचायतों के विकास के लिए सूबे की योगी सरकार  कह रही हो कि हमारे द्वारा सभी उ.प्र. के गाँव साफ सफाई के लिये सफाई कर्मी दिये गये हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है । गांव में लगा है गंदगी का अंबार सभी रास्तों में तालाब के जैसे कीचड़ भरा हुआ है आने जाने वाले राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है गांव में सफाई कर्मचारी सफाई करने के लिए कभी भी नहीं आता

 

आज भी ग्राम पंचायत कानाखेड़ा के मजरा घुइयारानी में आज भी गाँव के बाँशिदे गंदगी में रहने को मजबूर है। यह हमारे सामने बहुत बडा यक्ष प्रश्न है आज भी दलित बस्तियों के हालात बद से बदतर है। जैसा पूर्व की सरकारों मे था वैसा आज भी है। केवल सरकारी धन का बँदरबाट निचले स्तर से लेकर के ऊपर तक होता है।

भाजपा सरकार कहती है कि सबका साथ सबका विकास यहां तो केवल वोटबैंक राजनीति चल रही है। हमारे यहां के माननीय भी केवल चुनाव के समय भोली भाली जनता को सुनहरे सपने दिखाकर वोट ले लेते है फिर दोबारा पाँच साल वह अपनी सूरत नही दिखाते।

आज भी यहां के निवासी जो कि अर्थ से कमजोर है ऐसे व्यक्तियो को सरकार की तरफ से आई हुयी योजनाओं को किसी तरह का लाभ नही प्राप्त हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस खेल मे ग्राम प्रधान व सचिव तथा पँचायत मित्र इन तीनो लोगो ने मिलकर इस खेल में है जब पूरे मामले की जानकारी ग्राम प्रधान से लेनी चाहिए तो ग्राम प्रधान घर के बाहर थे जब फोन से संपर्क किया गया तो उनका फोन ही नही लगा है।

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