दादा माखनलाल हमारे कण-कण में बसे हैं – प्रो. के.जी.सुरेश

बीबीसीखबर, मध्य प्रदेशUpdated 30-01-2021
दादा

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प्रखर संपादक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित माखनलाल चतुर्वेदी और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया । इस अवसर पर मामाजी माणिकचन्द्र वाजपेयी सभागारका उद्घाटन मुख्य अतिथि हरियाणा एवं त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार स्वदेश भोपाल के प्रधान संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा द्वारा किया गया । आज के सन्दर्भ में महात्मा गांधी एवं पं. माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता की प्रासंगिकताविषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.के.जी. सुरेश ने की । 

           

 

हरियाणा एवं त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि दादा माखनलाल ने पत्रकारिता के मूल्यों के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया । उन्होंने कहा कि मनुष्य तो आता-जाता है, लेकिन यदि वह प्रासंगिक है तो वह अमर बन जाता है, और ऐसा ही दादा माखनलाल जी कर गए हैं । प्रो. सोलंकी ने दादा माखनलाल के साथ ही महात्मा गांधी को चिर-प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि दोनों ही जीवन मूल्यों के लिए जिए हैं । उन्होंने कहा कि दादा माखनलाल और बापू कहीं झुके नहीं और दोनों ने गुणों, मूल्यों का अवलंबन करके नाम कमाया है । पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नर से नारायण बनने की प्रेरणादायी बात कहते हुए उन्होंने कहा कि इन गुणों से आप भी प्रांसगिक हो सकते हैं । प्रो. सोलंकी ने विद्यार्थियों से इच्छाओं पर नियंत्रण की बात करते हुए कहा कि यदि आपको आजादी चाहिए तो अपनी इच्छाओं पर आजादी पाइए । उन्होंने कहा कि यदि आप 21 वीं शताब्दी में श्रेष्ठ योगदान करना चाहते हैं तो आपको इन दोनों विभूतियों के जीवन से सीख लेना चाहिए । प्रो.सोलंकी ने पत्रकारिता के धर्म को समझाते हुए कहा कि सामाजिक उत्तरदायित्व में ही यह निहित है, यदि जिम्मेदारी पूर्ण पत्रकारिता नहीं की गई तो समाज का बहुत नुकसान होगा । उन्होंने विश्वविद्यालय ने नाम में राष्ट्रीय शब्द जुड़े होने की महत्ता बताते हुए कहा कि यहां की पत्रकारिता, राष्ट्र को समर्पित होती है, इसलिए विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय है ।

           

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वदेश भोपाल के प्रधान संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि माखनलाल जी की पत्रकारिता को बलिपथ की पत्रकारिता कहा जाता है । उन्होंने देश के निर्माण की पत्रकारिता की । उनकी पत्रकारिता देश के लिए समर्पण की पत्रकारिता थी। श्री शर्मा ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से कहा कि आजीवन विनम्रता के साथ पत्रकारिता करने की सीख यदि किसी से लेना है तो दादा माखनलाल से लेना चाहिए । उन्होंने महात्मा गांधी की पत्रकारिता के बारे में कहा कि उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य स्वतंत्रता था । पत्रकारिता उनके लिए ऐसा वज्र था, जिससे आजादी मिल सके। राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता विशेष महत्व की जिम्मेदारी है । उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी एवं दादा माखनलाल जी की पत्रकारिता का मूल उद्देश्य राष्ट्रभक्ति था ।

            कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.के.जी.सुरेश ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभागार का नाम मामा जी माणिकचन्द्र वाजपेयी के नाम पर इसलिए किया गया है ताकि विद्यार्थी उनके बताए मार्ग पर चल सके । कार्यक्रम दिवस को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रो. सुरेश ने कहा कि पंडित जी हमारे कण-कण में बसे हैं । अपने दैनिक जीवन को दादा से  प्रेरित एवं प्रभावित होने की बात कहते हुए प्रो. सुरेश ने पत्रकारिता के संकट पर भी अपनी बात रखी । उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है।  उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी और पत्रकार विश्वसनीयता लौटाना चाहते हैं तो गांधी जी और दादा माखनलाल के विचारों पर चलना होगा।

            कार्यक्रम के अंत में स्वामी विवेकानंद की जयंती (युवा दिवस) के अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में आयोजित हुई प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेता विद्यार्थियों को अतिथियों के द्वारा पुरुस्कृत किया गया । विशेष व्याख्यान में विषय प्रवर्तन सहायक प्राध्यापक डॉ. पवन सिंह मलिक ने किया । आभार प्रदर्शन कुलसचिव प्रो. डॉ. अविनाश वाजपेयी द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक श्री लोकेन्द्र सिंह राजपूत ने किया ।

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