अटल टनल से करें ग्लेशियरों से भरी वादियों का दीदार करें

बीबीसीखबर, धर्मशालाUpdated 16-10-2020
अटल

 बीबीसी खबर

9.02 किलोमीटर लंबी अटल टनल रोहतांग से निकलते ही टनल का नॉर्थ पोर्टल सैलानियों की पहली डेस्टिनेशन बन गया है। चंद्रा नदी पर बना पुल अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल को मनाली लेह हाईवे से जोड़ता है। यहीं से सैलानी लाहौल घाटी की नैसर्गिक वादी को निहार सकते हैं।

बिना जंगल के पहाड़ और इन पहाड़ों की चोटियों पर बिछे दर्जनों ग्लेशियर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। नॉर्थ पोर्टल से महज 7 किमी दूर खूबसूरत गांव सिस्सू पहुंच कर सैलानी लगभग 300 फीट ऊंचे जलप्रपात का नजारा देख कर आनंदित हो उठते हैं। 

सिस्सू गांव के ठीक नीचे स्थित कृत्रिम झील में वोटिंग का मजा ले सकते हैं। इसी गांव में लाहौल घाटी के आराध्य देव राजा घेपन का मंदिर भी है। सिस्सू में पर्यटकों के ठहरने के लिए कई होटल भी बने है। यहां से लगभग 15 किमी दूर गोंदला में सैकड़ों साल पुराना किला है।

गोंदला से 14 किमी आगे चंद्रा और भागा नदी का प्राचीन और पवित्र तांदी संगम स्थित है। यहां पर चंद्रा और भागा नदी आपस में मिलकर एक हो जाती हैं। तांदी संगम का जिक्र वेदों में भी किया गया है। मान्यता है कि द्रोपदी ने इसी संगम में अपना देह त्यागी थी।

यह संगम हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए गंगा समान पवित्र है। संगम में मृतकों की अस्थियों को प्रवाहित करने की धार्मिक परंपरा है। यहां से महज 1 किमी आगे से एक रास्ता केलांग जिस्पा और दूसरा उदयपुर की तरफ निकलता है।

यह इलाका पट्टन घाटी के नाम से जाना जाता है। तांदी संगम से लगभग 36 किमी आगे हिंदू और बौद्धों का सबसे बड़ा सांझा धार्मिक स्थल त्रिलोकनाथ धाम पड़ता है। इस मंदिर के महत्व के साथ इसका इतिहास भी बड़ा रोचक है।

यहां दोनों धर्मों के लोग मिलकर एक ही मूर्ति की पूजा करते हैं। त्रिलोकनाथ धाम चंद्रा और भागा नदी के वामतट पर एक चट्टान के ऊपर स्थित है। यहां से महज 7 किमी दूर उदयपुर कस्बा पड़ता है। यहां महाभारत काल मे निर्मित माता मृकुला का प्राचीन मंदिर स्थित है।

मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने एक ही रात में एक पेड़ की लकड़ी से इस मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर के भीतर लकड़ी को उकेर कर महाभारत से लेकर बुद्ध के समय तक की घटनाओं को तस्वीरों के जरिये प्रदर्शित किया गया है।

 

तांदी संगम से 7 किमी लेह की तरफ जिला मुख्यालय केलांग स्थित है। केलांग के ठीक ऊपर सैकड़ों साल पुराना शशुर बौद्ध मठ है।

इसके साथ ही विख्यात आर्टिस्ट निकोलस रोरिक के पेंटिंग की गैलरी भी स्थित है। केलांग से करीब 25 किमी दूर जिस्पा पड़ता है। यह घाटी में सैलानियों के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल है।

यहां होटल से ज्यादा सैलानी कैंप में रुकने को प्राथमिकता देते हैं। वही केलांग से लगभग 55 किमी आगे मनाली लेह मार्ग पर सूरजताल पड़ता है। बारालाचा दर्रा यहां से करीब 20 किमी दूर है।

 

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