भक्त अति भाव से भगवान को पुकारता है तब भगवान अवतार लेते हैं

बीबीसीखबर, कानपुरUpdated 26-02-2021
भक्त

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श्री रामचरितमानस ज्ञान कथा यज्ञ के चौथे दिवस की कथा में मानस मर्मज्ञ उमाशंकर व्यास जी ने बताया कि भगवान का अवतार तब होता है। जब कोई भगवान का भक्त व्याकुल होकर अति भाव से उन्हें पुकारता है यद्यपि भक्त अत्यंत सहनशील होता है तथापि जब सहनशीलता से भी अधिक व्यथा व्याप्त हो जाती है तो भक्त भगवान को समस्या के समाधान हेतु हैं। मानस में वर्णित पृथ्वी जब व्याकुल हो जाती है रावण के अत्याचार से तब मुनियों देवताओं के पास जाती है और अपनी कथा सुनाती है जब ब्रह्मा भी समाधान नहीं दे पाते तो वह मार्ग पूछती है और ब्रह्मा और शंकर जी मिलकर पृथ्वी को आश्वासन देते हैं और सारे देवता मुनि मिलकर बड़े भाव से भगवान की प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना में भाव कैसा होना चाहिए इस संदर्भ में कथा ऋषि कहते हैं कि जैसे सुतीक्ष्ण के भाव से भगवान राम की प्रतीक्षा करते हैं और भावों से भर कर एक स्थान में बैठ जाते हैं तब भगवान स्वयं ही उनके पास आकर उन्हें दर्शन देते हैं और ब्रह्मा के नेतृत्व में भी भगवान की ऐसी ही प्रार्थना होती है।

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